भोपाल नवाब की दूसरी पत्नी फंसा गईं अरबों की प्रॉपर्टी में पेंच, सैफ अली खान को बड़ा झटका!

जबलपुर
 फिल्म अभिनेता सैफ अली खान की भोपाल स्थित 15000 करोड़ की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित करने से पहले एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है. इसके अनुसार भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह की दूसरी पत्नी भी थी, जिनका नाम आफताबजहां था. उनके नाम पर भी सैकड़ों एकड़ प्रॉपर्टी थी. इसे उन्होंने अपनी मर्जी से सरकार को सौंपने के लिए पत्र लिखा था. इसके अनुसार आफताबजहां की भी संपत्ति अब सरकार की संपत्ति होगी.

किसे कहते हैं शत्रु संपत्ति, क्या है अधिनियम?

बता दें कि शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के अनुसार भारत सरकार ने पाकिस्तान और चीन को भारत का शत्रु देश माना है. 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम के नाम से एक कानून पास किया गया था. इस कानून में यह स्पष्ट है कि यदि भारत का कोई नागरिक पाकिस्तान या चीन की नागरिकता ले लेता है तो भारत में उसकी संपत्तियों को सरकार शत्रु संपत्ति घोषित कर देती है और यह संपत्तियां भारत सरकार की संपत्तियां हो जाती हैं. साल 2015 में इस कानून में एक संशोधन में किया गया और इसमें एक लाइन यह भी जोड़ी गई की यदि इन संपत्तियों को लेकर कोई वसीयत है तो उनको भी नहीं माना जाएगा.

भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान ने दो शादियां की थीं

भोपाल के एडवोकेट जगदीश छावनी ने बताया " भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान ने दो शादियां की थीं. उनकी पहली शादी मेमुना सुल्तान से हुई थी. उनसे नवाब हमीदुल्लाह की तीन बेटियां थीं. उन्होंने 1947 में आफताबजहां से दूसरी शादी की. हालांकि, आफताबजहां नवाब हमीदुल्लाह की बेटी साजिया सुल्तान की सहेली थी और उम्र में काफी छोटी थी. लेकिन इसके बावजूद नवाब हमीदुल्लाह ने उनसे शादी की और अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी में उन्हें हिस्सा दिया. इसमें भोपाल का खानू गांव आता है. इसके तहत खेड़ी बॉर्बन, हलालपुर, बेहडा के साथ ही सीहोर और रायसेन जिले की कुछ जमीन शामिल थी."

नवाब हमीदुल्लाह खान की मौत के बाद दूसरी पत्नी पाकिस्तान शिफ्ट

नवाब हमीदुल्लाह खान की 4 फरवरी 1960 में मृत्यु के बाद आफताब बेगम भी भारत छोड़कर पाकिस्तान चली गई थीं. पाकिस्तान जाने के बाद भी उन्होंने अपनी संपत्तियों का दानपत्र या पावर ऑफ अटॉर्नी किसी को नहीं दी थी. 1977 का एक पत्र सरकार के पास है, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्तियों को भारत सरकार के हवाले करने की सहमति दी थी. आफताब बेगम का सन् 2000 में निधन हो गया. 1977 के पत्र के हवाले से और भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत भोपाल नवाब की दूसरी बेगम की संपत्तियों को भी शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है.

लाखों लोगों की संपत्ति के मालिकाना हक पर भी संकट

यदि सरकार इन संपत्तियों को अधिग्रहित करती है तो उन लाखों लोगों की संपत्तियां सरकारी घोषित हो जाएंगी, जो वर्तमान में इन पर काबिज हैं. हालांकि, इसमें से कुछ संपत्ति अभी भी लावारिस है. इसलिए उन पर सरकार का कब्जा हो ही सकता है. मतलब भोपाल नवाब की संपत्ति पर सैफ अली खान का दावा कमजोर पड़ गया है. इसमें से बहुत बड़ी संपत्ति तो भोपाल नवाब की दूसरी पत्नी की भी थी. नए प्रावधानों को माना जाए तो यह पूरी संपत्ति भारत सरकार को जा सकती है. इस मामले में सैफ अली खान पर यह आरोप भी है कि उन्होंने यह तथ्य याचिका के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से छुपाया है.

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