कॉमन हो चुका टाइप-सी चार्जर, असली-नकली की ऐसे करें पहचान

टाइप-सी चार्जिंग आज के वक्त में काफी कॉमन हो चुका है। ऐसे में कोई भी कहीं से चार्जर खरीदकर फोन चार्ज कर सकता है। साथ ही किसी का चार्जर लेकर फोन चार्ज किया जा सकता है। लेकिन ऐसा करना आपके लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। क्योंकि नकली चार्जर फोन में ब्लास्ट की वजह बन सकता है। इससे पहले कई सारे घटनाएं देखने को मिली है, जिसमें चार्जिंग के वक्त फोन में ब्लास्ट हुआ है। कई घटनाओं में फोन ब्लास्ट की वजह से जान तक जा चुकी है। अगर आप नहीं चाहते हैं, कि आपके साथ ऐसी कोई घटना हों, तो आपको ओरिजिनल चार्जर से फोन चार्ज करना चाहिए। इसके लिए सरकारी BIS Care App का इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्या है BIS Care App?
BIS Care App के ओनर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) है। जैसा कि मालूम होगा कि BIS भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफर कंज्यूमर अफेयर, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के तहत काम करता है। BIS भारत में बिकने वाली चीजों की क्वॉलिटी सर्टिफिकेशन संस्था है।

कहां से करें डाउनलोड
BIS Care App को हर एक मोबाइल फोन यूजर डाउनलोड कर सकता है। यह iOS के साथ एंड्रॉइड यूजर के लिए उपलब्ध है।

कैसे असली-नकली चार्जर का करें पता?
    सबसे पहले आपको iOS और एंड्रॉइड BIS Care App को डाउनलोड करना होगा।
    इसके बाद आपको ऐप ओपन करना होगा, और Verify R no. under CRS पर टैप करना होगा।
    फिर आपको दो ऑप्शन दिखेंगे। आप चाहें, तो प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन नंबर या फिर प्रोडक्ट क्यूआर कोड स्कैन करके असली-नकली चार्जर की पहचान कर सकते हैं।
    इसके बाद आपको चार्जर के नाम, प्रोडक्ट कैटेगारी, किस देश में चार्जर बना है, इंडियन स्टैंडर्ड नंबर और मॉडल चेक कर पाएंगे।

कैसे सर्च करें रजिस्ट्रेशन नंबर
जब आप कोई नया चार्जर खरीदते हैं, तो उस पर प्रोडक्ट नंबर और क्यूआर कोड दोनों दर्ज रहते हैं। अगर ऐसा नहीं है, तो पहली नजर में पता किया जा सकता है, कि चार्जर नकली है। इसके अलावा चार्जर की खरीद रसीद पर भी रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज रहता है। अब सवाल उठता है कि चार्जर कैसे लिखा होता है, तो बता दें कि इसकी शुरूआत R-XXXXXXX फॉर्मेंट में होती है।

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