अमित शाह और CM योगी ने लगाई संगम में डुबकी, स्वामी रामदेव भी रहे मौजूद

प्रयागराज

गृह मंत्री अमित शाह ने महाकुंभ में पहुंचकर संगम में डुबकी लगाई है। इस मौके पर उनके साथ सीएम योगी, स्वामी रामदेव और अन्य साधु-संत भी मौजूद रहे। अमित शाह, सीएम योगी और स्वामी रामदेव के स्नान के वीडियोज भी सामने आए हैं, जिसमें वह संगम पर स्नान करते हुए दिख रहे हैं।

अब तक कितने लोगों ने किया स्नान

27 जनवरी को खबर लिखे जाने तक 60.19 लाख से ज्यादा लोगों ने संगम में स्नान किया। वहीं महाकुंभ की शुरुआत से लेकर 26 जनवरी तक 13.21 करोड़ से ज्यादा लोग महाकुंभ में स्नान कर चुके हैं। अमित शाह के संगम स्नान से पहले सीएम योगी अपने मंत्रिमंडल के साथ भी महाकुंभ का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान सीएम योगी ने अपने मंत्रियों के साथ संगम में स्नान किया था।

26 जनवरी को अखिलेश यादव ने भी किया था स्नान

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी 26 जनवरी को महाकुंभ मेले में पहुंचकर संगम स्नान किया था। इसका भी वीडियो सामने आया था। अखिलेश के इस स्नान की सियासी गलियारों में चर्चा हो रही थी। दरअसल अखिलेश यादव ने महाकुंभ के आंकड़ों पर सवाल खड़े किए थे। अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाकुंभ को लेकर कहा था कि सरकार का हर आंकड़ा फर्जी है। उन्होंने कहा था कि कुछ ट्रेनें खाली जा रही है। सुनने में ये भी आया है कि गोरखपुर वाली ट्रेन खाली गई है। मोटी-मोटी बात ये है कि भाजपा का हर आंकड़ा फर्जी है।

CM योगी, राजनाथ सिंह ने लगाई डुबकी

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 जनवरी को महाकुंभ पहुंचे थे और कैबिनेट मंत्रियों के साथ आस्था की डुबकी लगाई थी. स्नान के पहले योगी कैबिनेट ने त्रिवेणी संकुल में मीटिंग की थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पहली बार महाकुंभ में पूरा मंत्रिपरिषद मौजूद है. इससे पहले देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 18 जनवरी को संगम तट पर पहुंचकर डुबकी लगाई थी.

महाकुंभ जाएंगी राष्ट्रपति मुर्मू

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी प्रयागराज के महाकुंभ में शामिल होने के लिए जाएंगी. जानकारी के मुताबिक, 10 फरवरी को द्रौपदी मुर्मू महाकुंभ में पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाएंगी.

क्यों मनाया जाता है कुंभ?

बता दें कि कुंभ का आधार एक पौराणिक कथा है. इसके मुताबिक सागर से अमृत खोजने के लिए मंथन हुआ. इस मंथन से मिले अमृत की बूंदें जिन चार जगहों पर नदियों में गिरीं, वहां कुंभ आयोजन होते हैं. इस कथा का पूरा वर्णन विष्णु पुराण, कूर्म पुराण, स्कंद पुराण, भागवत पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है.

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति