राजस्थान-कॉनफेड की 39वीं वार्षिक साधारण सभा में प्रमुख सचिव बोलीं-‘लाभ अर्जन एवं रोजगार सृजन करें’

जयपुर।

मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां एवं राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (कॉनफेड) की प्रशासक मंजू राजपाल ने कहा कि सहकारिता की भावना केवल लाभ अर्जित करना नहीं है, अपितु सहकारी संस्थाओं को प्रत्येक कार्य क्षेत्र में लाभ अर्जन एवं रोजगार सृजन के प्रयास करने चाहिए।

राजपाल मंगलवार को नेहरू सहकार भवन में आयोजित कॉनफेड की 39वीं वार्षिक साधारण सभा को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने सभी को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष की बधाई देते हुए कहा कि सहकारिता विभाग ‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में निरन्तर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम अर्जित करने के लिए सहकारी संस्थाओं के मध्य भी सहकार की भावना होनी चाहिए। कॉनफेड प्रशासक श्रीमती राजपाल ने विगत वर्ष में बेहतर लाभ अर्जन के लिए सभी को बधाई दी और कॉनफेड के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वर्ष में भी कॉनफेड भरसक प्रयास कर बेहतर परिणाम हासिल करेगा। श्रीमती राजपाल ने कहा कि कॉनफेड बेहतर कार्य कर अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए भी फेसिलिटेटर की भूमिका निभाए। साथ ही, उन्होंने नवाचारों पर फोकस करते हुए संघ के कार्यकलापों में नई गतिविधियां शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में ऐसी गतिविधियों को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे रोजगारों का सृजन हो और सदस्यों को लाभ अर्जन हो। राजपाल ने कहा कि जब हम अच्छा काम करते हैं तो कई तरह की चुनौतियां और बाधाएं भी आती हैं। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप कॉनफेड एवं भण्डारों को आरजीएचएस की बकाया 59 करोड़ की राशि के भुगतान के आदेश जारी हो गए हैं और भुगतान मिलना भी शुरू हो गया है। साधारण सभा में कॉनफेड की प्रबंध संचालक श्रीमती शिल्पी पांडे ने बताया कि वर्ष 2023-24 में संस्था का कुल शुद्ध लाभ लगभग 22.26 करोड़ रुपये रहा है। वर्ष 2023-24 हेतु सदस्य संस्थाओं को अधिकतम लाभांश 7.50 प्रतिशत वितरित किया जाएगा। बैठक में गत वार्षिक साधारण सभा की कार्यवाही की पुष्टि, वर्ष 2023-24 के ऑडिटेड अंतिम लेखे का अनुमोदन, वर्ष 2023-24 के माह नवम्बर, 2024 तक के खर्चों, कार्यकलापों व उपलब्धियों का अनुमोदन, वर्ष 2024-25 के व्यावसायिक लक्ष्यों व बजट आवंटन का अनुमोदन किया गया। बैठक में सदस्यों द्वारा अपने बहुमूल्य सुझाव भी प्रस्तुत किये गए। प्रारम्भ में प्रमुख शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां ने दीप प्रज्ज्वलन कर वार्षिक साधारण सभा का विधिवत शुभारम्भ किया। वार्षिक साधारण सभा में वित्त विभाग एवं खाद्य विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही उपभोक्ता भंडारों एवं केवीएसएस के निर्वाचित अध्यक्ष, प्रशासक एवं कॉनफेड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति