आर्थिक सर्वे 2025 में बताया- भारत में महंगाई से आम आदमी को जल्द राहत मिल सकती है

नई दिल्ली
भारत में महंगाई से आम आदमी को जल्द राहत मिल सकती है, जैसा कि आर्थिक सर्वे 2025 में बताया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 के चौथे तिमाही में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है, खासकर सब्जियों और खरीफ फसल के अच्छे उत्पादन की वजह से। हालांकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण कुछ जोखिम बने हुए हैं, फिर भी अगले कुछ महीनों में महंगाई की रफ्तार में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

महंगाई में मिलेगी राहत
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के चौथे तिमाही में खाद्य महंगाई कम होने का अनुमान है, क्योंकि सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है और खरीफ फसलों का अच्छा उत्पादन भी हो सकता है। इसके साथ ही रबी फसल के बेहतर होने की वजह से वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर काबू पाया जा सकेगा। हालांकि, खराब मौसम और अंतरराष्ट्रीय कृषि वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी की वजह से कुछ जोखिम बने हुए हैं।

खुदरा महंगाई में कमी
आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2024-25 में खुदरा महंगाई दर को 5.4% तक लाने में सफलता मिली है, जो पिछले 4 सालों का सबसे निचला स्तर है। यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे आम लोगों को राहत मिलेगी। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेश में गिरावट जैसी चुनौतियाँ मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता के लिए जोखिम बन सकती हैं।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई में उछाल
2024-25 के अप्रैल से दिसंबर के बीच कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) 8.4% तक पहुंच गया था, जो पिछले वर्ष 2023-24 में 7.5% था। सब्जियों और दालों की कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई दर में उछाल आया। लेकिन सर्वे में यह भी कहा गया है कि आने वाले महीनों में इस महंगाई में कमी आ सकती है।

भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा
आर्थिक सर्वे में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के बारे में भी भविष्यवाणी की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3% से लेकर 6.8% के बीच रहने का अनुमान है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक, अगले एक से दो दशकों में 8% के दर से आर्थिक विकास करने पर भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने में मदद मिल सकती है। आर्थिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए लेबर रिफॉर्म्स ने रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। इस बदलाव से श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी और उनका जीवन स्तर ऊंचा होगा।

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