116 देशों के राजनायिक आज महाकुंभ नगर का हिस्सा होंगे, अरैल में सभी देशों के झंडे भी लगाए जाएंगे

प्रयागराज

संपूर्ण दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना प्रयागराज महाकुंभ नित नए कीर्तिमान रच रहा है। विश्व के 116 देशों के राजनयिक कल महाकुंभनगर आ रहे हैं। सभी राजनयिक प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से हेलीकाप्टर से अरैल पहुंचेंगे। राजनयिकों के साथ विदेशमंत्री एस.जयशंकर पहुंच रहे हैं।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी का प्रयागराज में स्वागत करेंगे। सभी राजनयिक अरैल पहुंचने पर सबसे पहले अपने देश का झंडा फहरायेंगे। इसके बाद संगम में डुबकी लगाने पहुंचेंगे ।यह वैश्विक आयोजन मां गंगा के तट पर होगा। इस समागम में धुर विरोधी रूस और यूक्रेन के राजदूत भी शामिल होंगे। इसके अलावा अमेरिका, बांग्लादेश, जापान, जर्मनी, हंगरी, बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मलेशिया, जिम्बाम्बे, कम्बोडिया, इटली, नेपाल, थाईलैंड, स्वीडन व स्विटजरलैंड समेत 116 देशों के राजनयिक अमृतकाल के साक्षी बनेंगे।मेला अधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार, इस संबंध में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राजनयिक संगम में डुबकी लगाने के बाद अक्षयवट और लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन करेंगे। इसके बाद डिजिटल अनुभूति केंद्र में प्रयागराज के महात्म्य के संबंध में जानकारी लेंगे।

इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे आज शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसी क्रम में राजनायिक झंडे को सलामी देंगे। इसके बाद उन्हें क्रूज से वीआईपी घाट लाया जाएगा। संगम पर उनके स्नान की भी व्यवस्था रहेगी।

इसके लिए जेटी तैयार की जा रही है। वे अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों से भी मिलेंंगे। विदेशी डेलीगेट्स कला कुंभ, डिजिटल अनुभूति केंद्र समेत अन्य प्रदर्शनियों का अवलोकन करेंगे। शाम को सांस्कृतिक आयोजन में भी शामिल होंगे। इसके बाद वे वाराणसी के लिए रवाना होंगे।

मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी
यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि मेला प्रशासन ने पहले इसके लिए एक रुपये का शुल्क लगाया था, पर अब यह पूरी तरह मुफ्त है। वाटर एटीएम पर ऑपरेटर बैठते हैं, जो श्रद्धालुओं के कहने पर बटन दबाकर शुद्ध जल उपलब्ध करा रहे हैं। इनकी सेंसर के माध्यम से निगरानी भी होती है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को डेढ़ करोड़ ने किए हस्ताक्षर
श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और मंदिर के भव्य निर्माण को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से मेले में चल रहे अभियान में डेढ़ करोड़ लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। एक फरवरी को सेक्टर-16 स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माऊली के पंडाल में महासंवाद होगा। इसमें आगे के आंदोलन की आधारशिला रखी जाएगी।

अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मस्थली (वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद) को मुक्त कराने के लिए अभियान की शुरुआत जन्मभूमि के मुख्य द्वार से की गई थी। इसमें अब तक डेढ़ करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया है। साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य महासंवाद में शामिल होंगे।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति