गेहूं के दाम आसमान छू रहे, अगर यही बाजार भाव बना रहा तो सरकार को गेहूं खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना पड़ेगा

शहडोल
खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में जहां धान की खेती सबसे बड़े रकबे में की जाती है, तो वहीं रबी सीजन में गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में उगाया जाता है. दरअसल, साल भर गेहूं की खूब डिमांड रहती है. इन दिनों गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जो आम आदमी के पर्स पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है. लेकिन किसानों के नजरिए से देखें तो ये उनके लिए आने वाले समय के लिए राहत की खबर है. करीब 2 महीने बाद नया गेहूं आ जाएगा. इससे किसानों को मुनाफा होगा.

गेहूं के दाम छू रहे आसमान

वर्तमान में गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम आदमी परेशान है, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है. कारोबारी ने बताते हैं कि "गेहूं अलग-अलग क्वालिटी में 30 रुपए से लेकर के 38 रुपए किलो तक मिल रहा है. मार्केट में नया गेहूं आने से पहले इसका दाम कम नहीं होगा. अगर गेहूं के दाम बढ़े हुए हैं, तो यह तय बात है कि आटे के दाम भी बढ़ेंगे.इस समय नॉर्मल आटे का खुदरा मूल्य 40 रुपए प्रति किलो है. वहीं, किसी ब्रांड का आटा 45 रुपए से लेकर 50 रुपए प्रति किलो मिल रहा है.

सरकार को बढ़ाना पड़ सकती है MSP

जानकारों के मुताबिक, गेहूं के बढ़े हुए दाम सरकार की परेशानी बढ़ा सकते हैं. क्योंकि अगर सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी. अगर गेहूं का बाजार भाव यही रहा और सरकार ने एमएसपी नहीं बढ़ाई तो कोई भी किसान घाटा सहकर सरकार को अपनी उपज नहीं बेचेगा. पिछली बार सरकार ने 2275 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी की दर से गेहूं की खरीद की थी. प्रदेश सरकार ने इस बार 125 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को बोनस देने की बात भी कही है.

गेहूं का यही रेट रहा तो किसानों को होगा फायदा

अगर पिछले साल के रेट और बोनस को मिलाकर देखे तो गेहूं का मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल होता है. ऐसे में अगर वर्तमान बाजार मूल्य थोड़ी बहुत टूट के साथ भी बरकरार रहा तो सरकार को गेहूं खरीद के लिए एमएसपी बढ़ानी होगी. बशर्ते गेहूं का बाजार मूल्य यही बना रहे. लेकिन सामान्यतः नई उपज आने के बाद गेहूं का मूल्य धड़ाम हो जाता है.

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