03 फरवरी 2025 सोमवार का राशिफल, जानिए क्या कहती है आपकी राशि

मेष राशि- अज्ञात भय सताएगा। सर दर्द, नेत्र पीड़ा संभव है। सर दर्द और नेत्र पीड़ा के कारण मन व्याकुल रहेगा। अज्ञात भय तो रहेगा ही। कुल मिलाकर के आपको शारीरिक स्थिति पर पूरा-पूरा ध्यान रखना है। प्रेम और संतान की स्थिति लाभप्रद है। व्यापार भी आपका अच्छा चलेगा। काली वस्तु का दान करें।

वृषभ राशि– आय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। मन अस्थिर रहेगा। यात्रा में कष्ट संभव है। बाकी प्रेम, संतान, व्यापार सही रहेगा। समाचार के माध्यम से कुछ अनचाहा समाचार मिल सकता है। लाल वस्तु का दान करना शुभ होगा।

मिथुन राशि– व्यावसायिक उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कोर्ट-कचहरी में हार का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक गलियारे में कुछ बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य मध्यम। प्रेम, संतान अच्छा है। व्यापार भी अच्छा है। पीली वस्तु का दान करें।

कर्क राशि– भाग्य में भरोसा करके कोई काम नहीं कर सकते हैं। थोड़ा सा बदनामी या अपयश मिल सकता है। स्वास्थ्य मध्यम। प्रेम, संतान मध्यम। व्यापार भी मध्यम। काली वस्तु का दान करें।

सिंह राशि– परिस्थितियां प्रतिकूल हैं। कोई रिस्क न लें। चोट-चपेट लग सकती है। किसी परेशानी में पड़ सकते हैं। स्वास्थ्य मध्यम। प्रेम, संतान मध्यम। व्यापार ठीक रहेगा। पीली वस्तु पास रखें।

कन्या राशि- जीवनसाथी के साथ और स्वास्थ्य पर ध्यान रखें। नौकरी-चाकरी की स्थिति मध्यम रहेगी। बाकी प्रेम, संतान, व्यापार आपका सही है। शनिदेव को प्रणाम करते रहें।

तुला राशि- डिस्टर्बिंग टाइम लेकिन जीत आपकी सुनश्चित है। कार्यों में अवरोध आएगा लेकिन संपन्न हो जाएगा। स्वास्थ्य मध्यम। प्रेम, संतान अच्छा। व्यापार अच्छा। नीली वस्तु पास रखें।

वृश्चिक राशि- मानसिक दबाव बना रहेगा। अवसादग्रस्त स्थिति रहेगी। महत्वपूर्ण निर्णय अभी रोक दें। बच्चों की सेहत पर ध्यान दें। प्रेम में तू-तू, मैं-मैं से बचें। मानिसक नकारात्मक के शिकार बन सकते हैं। व्यापार अच्छा है। पीली वस्तु पास रखें।

धनु राशि- गृह कलह के संकेत हैं। कुछ बड़ी कलह हो सकती है। ध्यान रखिएगा। शांत होकर चीजों को निपटाएं। स्वास्थ्य मध्यम। प्रेम, संतान मध्यम। व्यापार मध्यम। बजरंगबली की शरण में जाएं, उन्हें प्रणाम करें। लाल वस्तु अर्पित करें। काली वस्तु का दान करें।

मकर राशि- पराक्रम अभी बहुत रिजल्ट नहीं देगा। नाक, कान, गला की परेशानी हो सकती है। प्रेम, संतान अच्छा है। व्यापार मध्यम है। काली जी को प्रणाम करें, उन्हें सफेद वस्तु अर्पित करें।

कुंभ राशि- पूंजी का निवेश न करें। जुआ, सट्टा, लॅाटरी में पैसा न लगाएं। धन हानि के संकेत हैं। मुख रोग के शिकार हो सकते हैं। बाकी प्रेम, संतान, व्यापार अच्छा है। हरी वस्तु पास रखें।

मीन राशि- नकारात्मक ऊर्जा का शिकार चल रहा है इस समय। प्रेम और संतान में नकारात्मकता फैली रहेगी। स्वास्थ्य प्रभावित दिख रहा है। कुल मिलाकर के बहुत बचकर पार करें। काली जी की शरण में जाएं, उन्हें प्रणाम करें। तंत्र की सबसे बड़ी देवी हैं। वो नकारात्मकता को दूर करेंगी।

admin

Related Posts

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति