भारत तीसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्‍बी बेड़े में शामिल करने जा रहा, हिंद महासागर बनेगा अखाड़ा

नई दिल्‍ली
 दक्षिण चीन सागर के बाद अब हिंद महासागर में भी हथियारों की रेस तेज होती जा रही है। चीनी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति के बीच भारत अब अपनी तीसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्‍बी को शामिल करने जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस भारतीय परमाणु पनडुब्‍बी को इस साल के आखिर में शामिल कर लिया जाएगा। भारतीय नौसेना में यह किलर पनडुब्‍बी ऐसे समय पर शामिल की जा रही है जब पाकिस्‍तान की नौसेना चीन और तुर्की की मदद से बहुत तेजी से आधुनिकीकरण कर रही है और ताकत बढ़ा रही है। भारतीय नौसेना के पास इस समय दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्‍बी आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात है। तीसरी परमाणु पनडुब्‍बी आईएनएस अरिदमन का पिछले 3 साल से ट्रायल चल रहा है और इसे इस साल तक नौसेना में शामिल किया जाएगा।

दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी चीन की पीएलए ने अपनी सबमरीन ताकत के लिए पानी की तरह से पैसे बहा रही है। चीन की नौसेना के पास इस समय 6 परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्‍बी, 6 अटैक परमाणु पनडुब्‍बी और 48 डीजल से चलने वाली एआईपी तकनीक से लैस परंपरागत पनडुब्‍बी है। एआईपी से लैस पनडुब्‍बी कई दिनों तक पानी में रह सकती है। चीन की पुरानी सबमरीन के रिटायर होने के बाद भी साल 2025 तक उसकी सबमरीन ताकत 65 तक बनी रहेगी। चीन लगातार सबमरीन बना रहा है और यह साल 2035 तक बढ़कर 80 पहुंच जाएगी।

चीन और पाक‍िस्‍तान से पिछड़ा भारत

चीन जहां बहुत तेजी से अपनी सबमरीन ताकत को बढ़ा रहा है, वहीं भारत की पहली अटैक परमाणु पनडुब्‍बी साल 2036 तक और दूसरी साल 2038 तक नेवी में शामिल होगी। भारतीय नौसेना में हाल ही में 6 कलावरी श्रेणी की परंपरागत सबमरीन शामिल हुई हैं। भारत अब फ्रांस से 3 और कलावरी श्रेणी की पनडुब्बियों को शामिल करने के लिए बात कर रहा है। भारत की कलावरी पनडुब्बियां एआईपी तकनीक से लैस नहीं हैं जिसकी वजह से ये ज्‍यादा समय तक पानी में नहीं रह पाती हैं। अब भारत रिफिट के दौरान इन पनडुब्बियों में एआईपी तकनीक लगाएगा।

एआईपी तकनीक से लैस होने के बाद ये सबमरीन करीब 3 सप्‍ताह तक पानी के अंदर रह सकेंगी। भारत और जर्मनी के बीच भी 6 अत्‍याधुनिक सबमरीन के लिए बातचीत चल रही है। इन पनडुब्बियों में भी एआईपी तकनीक लगी होगी। कई विश्‍लेषकों का कहना है कि इस साल तक तकनीकी बातचीत पूरी होगी और पहली पनडुब्‍बी साल 2030 के बाद ही भारत को मिल सकती है। भारत जहां पिछड़ रहा है, वहीं पाकिस्‍तानी नौसेना बहुत बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण कर रही है।

पाक‍िस्‍तान ने खरीदी चीन की खतरनाक शिकारी

पाकिस्‍तानी नौसेना में चीन की मदद से 30 अत्‍याधुनिक युद्धपोत शामिल किए जाएंगे। पाकिस्‍तान चीन से हंगोर क्‍लास की 8 सबमरीन को शामिल कर रहा है। यह चीनी सबमरीन एआईपी तकनीक से लैस होगी। पाकिस्‍तान को उम्‍मीद है कि इस सबमरीन से हिंद महासागर में शक्ति संतुलन बदल सकता है। पाकिस्‍तान की ऐसी पहली पनडुब्‍बी अप्रैल 2024 पानी में उतार दी गई थी और इसका ट्रायल चल रहा है। वहीं भारत अभी पिछड़ता दिख रहा है।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति