तुलसी मानस प्रतिष्ठान की गतिविधियां बढ़ाई जाएं- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मानस भवन में तुलसी मानस प्रतिष्ठान की प्रबंधकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रतिष्ठान की गतिविधियों को और अधिक विस्तारित करने का सुझाव दिया और संबंधितों को इस पर अमल करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रतिष्ठान से रामायण, तुलसी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने युवाओं और विद्वानों को जोड़ने के लिए चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थल पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। बैठक में प्रबंधकारिणी समिति के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा, संयोजक राजेन्द्र शर्मा, कोषाध्यक्ष विजय अग्रवाल, वरिष्ठ सदस्य सुरेश पचौरी एवं कैलाश जोशी, समिति सदस्य एवं कलेक्टर भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह सहित समिति के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिष्ठान की आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को इस पहल से जोड़ा जाए, जिससे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूती मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऑनलाइन माध्यमों से भी रामायण और तुलसी साहित्य को अधिक लोगों तक पहुंचाये। उन्होंने आगामी आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने और इनसे जनसामान्य को जोड़ने के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। प्रतिष्ठान की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए सुझावों पर बैठक में गहनता से विचार-विमर्श किया गया। कार्याध्यक्ष शर्मा ने मानस भवन के सामने न रोड का चौड़ीकरण किये जाने और मानस भवन, हिंदी भवन और गांधी भवन के बीच अवैध निर्माण हटवाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कलेक्टर भोपाल को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिति को अवगत कराया कि सरकार प्रदेश में शराबबंदी पर गंभीरता से विचार कर रही है। गीता के ज्ञान और हमारी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश में 'गीता भवन' बनाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. ने बताया कि हमारी सरकार पुण्यभूमि हरिद्वार जैसे प्रबंध अब महाकाल नगरी उज्जैन में भी कराने की ओर अग्रसर है। साधु-संतों, अखाड़ों और धर्मशालाओं को उज्जैन के सिंहस्थ मेला क्षेत्र में स्थायी प्रकृति के निर्माण कार्यों की अनुमति दी गई है। इससे स्थायी आश्रम, मठ, धर्मशालाएं, सत्संग स्थल बनाये जा सकेंगे। कलेक्टर ने समिति को अवगत कराया कि भोपाल में भी स्मार्ट सिटी रोड पर टीटी नगर के पास करीब एक एकड़ भूमि में गीता भवन बनाया जायेगा।

समिति सदस्यों ने प्रतिष्ठान के विकास संबंधी विभिन्न विषयों/कार्यों के संबंध में मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। मुख्यमंत्री ने सभी विषयों/सुझावों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र क्रियान्वयन का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान की मासिक मुख पत्रिका “तुलसी मानस भारती’’ का विमोचन भी किया।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति