भोपाल के सुभाष नगर मार्केट में 110 दुकानों को हटाने की नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई 8 फरवरी को होगी

भोपाल

राजधानी भोपाल के सुभाष नगर मार्केट में करीब 110 दुकानों को हटाने की नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई 8 फरवरी को होगी. गुरुवार को पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर लोगों को स्वेच्छा से दुकान हटाने को कहा. इसके बाद दुकानदार आज सुबह से सामान हटाते नजर आए.

4 दिन से पुलिस फोर्स न होने के चलते दुकानों पर बुलडोजर नहीं चल पा रहा था. जिला प्रशासन, नगर निगम और रेलवे ने इससे पहले 4 फरवरी तक बस्ती को खाली करने का नोटिस जारी किया था. जिसके बाद से बस्ती में रहने वालों को बेघर होने का डर सता रहा है.

हालांकि, रहवासियों की मांग और परीक्षाओं को देखते हुए बस्ती हटाने पर 2 महीने तक रोक लग गई है, लेकिन दुकानों को हटाने पर रोक नहीं लगी है और इसलिए दुकानों को शनिवार को तोड़ना शुरू कर दिया जाएगा.  

दरअसल, भोपाल में सुभाष नगर आरओबी की ​थर्ड लेग के निर्माण के लिए सुभाष नगर मार्केट और चौथी रेल लाइन बिछाने के लिए मोती नगर बस्ती को हटाने की कार्रवाई होनी है.

डीसीपी जोन-1 प्रियंका शुक्ला ने पुलिस अफसरों के साथ  मुआयना भी किया। वहीं, एडीएम प्रकाश नायक और एमपी नगर एसडीएम एलके खरे ने निरीक्षण किया था। अफसरों की समझाइश के बाद कई दुकानदारों ने सामान हटाना भी शुरू कर दिया, लेकिन कई अभी भी अड़े हैं। ऐसे में शुक्रवार को प्रशासन इन्हें नगर निगम के अमले की मदद से हटाने की कार्रवाई करेगा।

4 फरवरी को ही होनी थी कार्रवाई बता दें कि 4 फरवरी तक बस्ती खाली करने का समय था, लेकिन पुलिस फोर्स नहीं मिलने की वजह से कार्रवाई नहीं हो सकी। दो दिन तक कार्रवाई अटकी रही।

बस्ती में कुल 384 मकान मोतीनगर बस्ती में कुल 384 मकान हैं। यहां 110 पक्की दुकानें भी हैं। इन दुकानों को हटाने से कार्रवाई की शुरुआत होगी। नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।

दुल्हन को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच चुके कांग्रेसी

मोतीनगर बस्ती को हटाने का विरोध भी किया जा रहा है। तीन दिन पहले कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला एक दुल्हन को लेकर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के पास पहुंच गए थे। शुक्ला ने कहा था, जिला प्रशासन की कार्रवाई के पहले मोतीनगर से कई मानवीय पहलू सामने आ रहे हैं।

यदि प्रशासन मौजूद सैकड़ों परिवारों को मोहलत नहीं देता है तो उनके सामने आर्थिक संकट के अलावा नैतिक संकट भी खड़े हो रहे हैं। किसी के घर में बेटी के हाथ पीले होने हैं तो कहीं बेटे की शादी की तैयारी हो रही है। इस स्थिति में भी कार्रवाई होती है तो कई शादियां भी टालनी होगी। दूसरी ओर, बच्चों की परीक्षाएं भी हैं। हालांकि, बच्चों की संख्या को लेकर प्रशासन ने सर्वे भी किया है।

 

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