मध्य प्रदेश थीम पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले का हरियाणा में शुभारम्भ

 

– मध्यप्रदेश की समृद्ध संस्कृति और शिल्पकला का होगा भव्य प्रदर्शन
– लोक नृत्य और संगीत का अद्भुत संगम
– हस्तशिल्प और हथकरघा शिल्पकारों की अनूठी प्रदर्शनी

भोपाल/ फरीदाबाद

38वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले का आज भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें इस वर्ष मध्यप्रदेश थीम राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मेले का उद्घाटन पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के श्री शिव शेखर शुक्ला  ने कहा, “मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक शिल्प को वैश्विक मंच प्रदान करने का यह एक बेहतरीन अवसर है। कारीगरों और कलाकारों को प्रदेश की स्थानीय कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा।”

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा मेले में मध्य प्रदेश की विशेषताओं को दर्शाते हुए विशेष मंडप स्थापित किया गया है, जहां पर्यटकों को प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों की जानकारी दी जा रही है। मंडप को विशेष रूप से पारंपरिक स्थापत्य शैली में डिजाइन किया गया है, जिससे यह मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बन सके। यहां डिजिटल डिस्प्ले और ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन के माध्यम से पर्यटकों को एक समृद्ध अनुभव प्रदान किया जा रहा है। गौरतलब है कि सूरजकुंड शिल्प मेला 1987 से आयोजित किया जा रहा है और यह भारत की हस्तशिल्प परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने का सबसे प्रतिष्ठित मंच बन चुका है।

यह मेला 7 फरवरी से 23 फरवरी तक चलेगा और इसमें मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, शिल्प, संगीत और व्यंजन को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश मंडप में पर्यटकों को राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प परंपराओं और लोक संस्कृति का अनुभव प्राप्त होगा। इसमें चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों, बाग प्रिंट, गोंड पेंटिंग, ढोकरा शिल्प, अजरक प्रिंट, भीली गुड़िया, लौह शिल्प, कशीदाकारी और खादी उत्पादों का भव्य प्रदर्शन किया गया है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के तहत भगोरिया, गणगौर, मटकी, गुदुमबाजा, करमा, भड़म, बरेदी, बधाई-नौरता और अहिराई जैसे लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।यही नहीं, मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिल्पकार और हथकरघा कारीगर अपने उत्कृष्ट उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे। हैं। यह मेला न केवल कारीगरों को अपने शिल्प को प्रस्तुत करने का अवसर देता है, बल्कि उन्हें ग्राहकों और व्यापारियों से सीधे जुड़ने का भी मौका प्रदान कर रहा है।

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