नीति आयोग ने कहा विकसित भारत के लिए विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा की जरूरत

नई दिल्ली
वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश में विश्व स्तरीय शिक्षा की जरूरत होगी। नीति आयोग द्वारा गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पर आधारित एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, भारत को उच्च शिक्षण संस्थानों में मानव संसाधन मुहैया कराने जैसे अहम पक्षों पर ध्यान देनी की जरूरत है। खासकर तौर पर राज्यों और राज्य सरकारों द्वारा संचालित किए जा रहे विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों पर ध्यान देनी की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि नई शिक्षा नीति (2020) के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 4.3 करोड़ से बढ़कर करीब नौ करोड़ हो जाएगी। इनमें से सात करोड़ छात्र राज्य व राज्य सरकारों द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों में पढ़ेंगे। मौजूदा समय देश के अंदर 495 राज्य विश्वविद्यालय है, जिनसे संबद्ध 46 हजार से अधिक शिक्षा संस्थान हैं। इसमें से सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के अंदर हैं।

आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों को समझने, उनका नीतिगत समाधान और रणनीतिक हस्तक्षेप का पता लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों से फीडबैक लिया गया। इसके साथ ही, प्रमुख राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षाविदों और राज्य उच्च शिक्षा परिषदों के प्रमुखों के साथ भी व्यापक विचार-विमर्श किया।

सुधार के लिए दिए गए ये सुझाव

शिक्षा में सुधार के लिए गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर शोध नीति को लाने की जरूरत है। स्थानीय स्तर आने वाली चुनौतियों को सुलझाने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का एक क्लस्टर बनाया जाना चाहिए। सेमेस्टर के स्तर पर शिक्षा गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। छात्र बेहतर तरीके से सीख पाएं, इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाए। शिक्षा क्षेत्र में आ रहे बदलाव व नई जानकारी के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ समझौते किए जाएं, जिससे छात्र और शिक्षकों को अपडेट रहने में मदद मिल सके।

राज्य स्तर पर एक ऐसी एजेंसी स्थापित की जाए जो राज्य विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी फंड उपलब्ध करा सके। राज्य विश्वविद्यालय को शिक्षा और शोध के लिए करों से जुड़ी छूट प्रदान की जानी चाहिए। उन्हें पानी, बिजली समेत अन्य जनसुविधाओं की व्यावसायिक दरों की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। राज्य विद्यालयों की बिल्डिंग, शोध व अन्य जनसुविधाओं को बेहतर करने के लिए सीएसआर फंड को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

राज्य स्तर पर उच्च शिक्षा के लिए 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करते हुए राज्य विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक स्वायत्तता को बढ़ावा दिया जाए। विश्वविद्यालय से जुड़ी मान्यता व अन्य प्रक्रिया को पारदर्शी व आसान बनाने के लिए बड़े बदलाव किए जाएं। राज्यों के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाना चाहिए।

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तेजी से पैदा हों, इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर से ही इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा दिया जाए। उद्यमशीलता और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाए। ऐसे छात्रों को बढ़ावा दिया जाए जो रोजगार पैदा करने के प्रति उत्साहित हैं। विश्वविद्यालय को ऐसे पाठयक्रमों को डिजाइन करना चाहिए, जो रोजगार के अवसर मुहैया करने में मदद करते हों। विश्वविद्यालय को शारीरिक शिक्षा, खेल और कल्याण कार्यक्रमों को एकीकृत करना चाहिए।

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