दिल्ली में आप CM की कुर्सी छिनी पर आतिशी की सैलरी और सुविधाओं में नहीं होगी कमी

 

नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी की हार के बाद आतिशी मार्लेना की मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही छिन गई, लेकिन उनके वेतन, भत्तों और सुविधाओं में कटौती नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष के लिए वेतन और भत्ते एक जैसे हैं। इनके अलावा डिप्टी स्पीकर और मंत्रियों के लिए भी यही वेतन-भत्ते लागू हैं।

अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं आतिशी का चुनाव बाद इस पद से हटना तय था। यदि चुनाव में आम आदमी पार्टी की भी जीत हुई होती तो भी उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी थी। पार्टी ने घोषणा की थी कि यदि चुनाव में जीत मिली तो अरविंद केजरीवाल दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे। 'आप' की हार के बाद 'आप' को विपक्ष में बैठना पड़ा है। ऐसे में पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और चुने हुए विधायकों ने आतिशी को नेता विपक्ष के रूप में स्वीकार किया। नेता विपक्ष की कुर्सी मिलने से यह तय हो गया कि उन्हें पहले की तरह वेतन और अन्य भत्ते मिलते रहेंगे।

दिल्ली विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में स्पीकर, डिप्टी, स्पीकर, मुख्यमंत्री-मंत्रियों और नेता विपक्ष की सैलरी और भत्ते समान हैं। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं (14 फरवरी 2023 से लागू)

मासिक वेतन– 60,000 प्रति माह
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता– 30,000 प्रति माह
सचिवीय सहायता भत्ता– 25,000 प्रति माह
प्रतिनिधिक भत्ता– 10,000 प्रति माह
कुल वेतन और भत्ते– 25,000 प्रति माह

अन्य सुविधाएं और भत्ते
सरकारी वाहन, चालक और 700 लीटर तक पेट्रोल मुफ्त।
यदि स्वयं का वाहन उपयोग किया जाए, तो 10,000 प्रति माह का वाहन भत्ता।
दैनिक भत्ता – 1,500 प्रति दिन (पूरे कार्यकाल के दौरान)।

डाटा एंट्री ऑपरेटर का वेतन
प्रति माह 30,000 तक (दो ऑपरेटरों के लिए, प्रत्येक को 15,000)।
एकमुश्त भत्ता–
1,00,000 का भुगतान लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, मोबाइल आदि की खरीद के लिए।
कार के लिए अडवांस
12,00,000 तक का अग्रिम ऋण वाहन खरीदने के लिए, जिसे कार्यकाल के दौरान चुकाना होगा।ब्याज दर और वसूली का तरीका सरकार तय करेगी, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

आवास और बिजली और इलाज
सरकारी आवास की सुविधा दी जाती है। यदि किराये पर रह रहे हैं तो अधिकतम 20 हजार रुपए मासिक दिए जाते हैं। यदि स्वयं के मकान में रहते हैं, तो उसकी दर की गणना कर उतनी ही राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री को प्रतिमाह 5000 यूनिट और मंत्रियों को 3 हजार यूनिट प्रतिमाह बिजली का खर्च। इसके अलावा सालाना एक लाख रुपए भारत में यात्रा के लिए दिए जाते हैं।

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