दो हफ्ते फर्श पर सोने से शरीर में दिखेंगे बदलाव

हमारी नींद काफी हद तक हमारी सेहत को प्रभावित करती है। हम कब और कितना सोते हैं, इसके साथ-साथ हम कैसे सोते हैं, यह भी काफी मायने रखता है। इन दिनों लोग अपने कम्फर्ट के हिसाब से सोने के लिए अलग-अलग मैट्रेस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आपने कभी सोचा है कि अगर आप बिना गद्दे जमीन पर सोएंगे तो क्या होगा। आइए आज इस आर्टिकल में इसी सवाल का जवाब ढूढंते हैं।

फर्श पर सोना सदियों से विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का हिस्सा रहा है। अक्सर यह माना जाता है कि जमीन पर सोने से पोश्चर, स्पाइनल अलाइनमेंट और पूरी हेल्थ को फायदा मिलता है। हालांकि, कई मौजूद समय में इस्तेमाल होने वाले गद्दे ज्यादा आराम पहुंचाते हैं, लेकिन फिर भी कुछ लोगों का मानना है कि फर्श पर सोने से शरीर को ज्यादा प्राकृतिक स्थिति में आराम करने को मिलता है।

शारीरिक परिवर्तन
ऐसे में अगर आप सिर्फ दो हफ्तों तक जमीन यानी फर्श पर सोते हैं, तो इससे रीढ़ की हड्डी के अलाइनमेंट महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। इतना ही नहीं कुछ लोगों के लिए, खासकर नरम गद्दे के कारण पीठ दर्द से परेशान लोगों के लिए, फर्श पर सोना फायदेमंद हो सकता है। एक कठोर सतह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखती है। इसके कुछ अन्य फायदे निम्न हैं-

    जमीन पर सोने से पीठ दर्द से राहत मिलती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक के मुताबिक पीठ दर्द से पीड़ित लोगों को सख्त सतह पर सोने से फायदा मिल सकता है।
    नर्म गद्दे पर सोने से पीठ दर्द के अलावा कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें कम लचीलापन, रीढ़ की हड्डी का डिस्प्लेस होने और चोट का खतरा शामिल हैं। ऐसे में फर्श पर सोने से अपनी रीढ़ को सीधा रखना आसान हो सकता है।
    खराब गद्दे पर सोने की वजह से अक्सर नींद प्रभावित होती है, जिससे अनिद्रा की समस्या हो सकती है। अगर आप गद्दा भी आपको परेशान कर रहा है, तो फर्श पर सोने से आपको अच्छी नींद आएगी।
    फर्श पर सोने से आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे मांसपेशियों का तनाव कम होता है और शरीर के सभी अंगों तक ब्लड फ्लो बेहतर होता है।

नीचे सोने के कुछ नुकसान भी
यूं तो नीचे सोने से फायदे होते हैं, लेकिन इसकी वजह से कई समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए इनका ध्यान रखना जरूरी है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन (2011) के एक अध्ययन से पता चला है कि सही गद्दे पर सोने से लंबे समय तक निर्बाध नींद मिलती है। ऐसे में कठोर सतहों पर सोने वालों को असुविधा के कारण कम नींद का अनुभव हो सकता है।

इसके अलावा कठोर सतहों पर सोने से जोड़ों की परेशानी बढ़ सकती है, विशेष रूप से कूल्हों और कंधों में। साथ ही बुजुर्गों या ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित व्यक्तियों को भी कठोर सतहों पर सोते समय हड्डियों पर दबाव या जोड़ों में अकड़न का अनुभव हो सकता है।

नीचे सोते समय इन बातों का रखें ध्यान
इसलिए जमीन पर सोते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। फर्श पर सोने का मतलब यह नहीं कि आप सीधा जमीन पर ही सो जाए। फर्श पर सोने के लिए आप किसी चटाई या दरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही नीचे सोते समय बहुत ऊंचा तकिया न लगाएं। आप एक पतले तकिए का इस्तेमाल करें, ताकि सिर ज्यादा ऊपर न हो और इससे होने वाले दर्द से बचा जा सके।

इसके अलावा आप नीचे कैसे होते, यह भी काफी मायने लगता है। इसलिए सोने के लिए सही पोजीशन का चुनाव करें। आप करवट लेकर, पेट के बल या पीठ के बल किसी भी तरह से सो सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि आपको किस पोजीशन में आराम मिल रहा है। साथ इसका भी ध्यान रखें कि आप बहुत ज्यादा दर्द में नहीं सोएं।

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