सीएम योगी ने कहा- मीडिया की भूमिका और प्रासंगिकता को परिवर्तनशील माहौल में भी नहीं किया जा सकता कम

गोरखपुर
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया को मान्यता दी गई है। मीडिया ही लोकतंत्र के प्रति सजग प्रहरी के रूप में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित कर अन्य तीन स्तंभों को किसी न किसी रूप में झकझोरती है। किन्हीं कारणों से छूटे हुए मुद्दों को सही तथ्यों के साथ प्रस्तुत कर जन सरोकार से जोड़ती है। मीडिया की भूमिका पूरी दुनिया में समय-समय पर अलग-अलग रूप में देखने को मिली है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोरखपुर में आयोजित एक प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में कही।

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि देश में कई ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर को मीडिया के जरिए आगे बढ़ाने का काम किया था। देश के स्वाधीनता आंदोलन में उन्होंने पत्रकारिता के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। इसमें सबसे पहला नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आता है, जिन्होंने अपनी लेखनी से समाचार पत्रों को प्रोत्साहित किया था। लोकमान्य तिलक ने जन चेतना को जागरूक करने के लिए गणपति महोत्सव का आयोजन किया। इसके अलावा लाल लाजपत राय, गणेश शंकर विद्यार्थी आदि ने अपनी लेखनी की धार से समाज को नई दिशा दी। जिस समय देश के लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा था, तब समाचार समूहों ने अपनी लेखनी के माध्यम से लोकतंत्र को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। मीडिया की भूमिका और प्रासंगिकता को परिवर्तनशील माहौल में भी कभी कम नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी से पूरी दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में मीडिया जगत में भी तेजी के साथ बदलाव हो रहा है ताकि समाज तक टेक्नोलॉजी से जुड़कर सही तथ्यों को उन तक पहुंचाया जा सके। आज युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही है क्योंकि उसके पास समय कम है। ऐसे में मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है कि उन तक सकारात्मक चीजें पहुंचाई जाएं क्योंकि कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म का दुरुपयोग कर नकारात्मकता फैलाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में मीडिया जगत अपनी जिस भूमिका के लिए जानी जाती है, उसी भूमिका के साथ उसे आगे बढ़ना होगा। यह न केवल लोकतंत्र बल्कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए बड़ा कार्य होगा।

सीएम योगी ने आगे कहा कि सुशासन और लोकतंत्र की पहली शर्त संवाद है। हम जबरन अपनी बात को किसी पर थोप नहीं सकते हैं, लेकिन संवाद से बड़े से बड़ी समस्या का समाधान कर सकते हैं। वहीं जब भी हम संवाद की भाषा से अपने आप को अलग करते हैं, तो नए संघर्ष को बढ़ावा मिलता है। हमें उस संघर्ष से बचने की आवश्यकता है। ऐसे में अगर मीडिया उस संवाद की भाषा को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगी, तो निश्चित रूप से बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। सीएम ने कहा कि संवाद को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम मीडिया है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि एक लाख लोगों को इकट्ठा करके अपनी बात कही जाए, इसके लिए कुछ लोग ही पर्याप्त हैं। वहीं लोग करोड़ तक आपकी आवाज को पहुंचाएंगे। इसके लिए मीडिया को आगे आना होगा।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति