30 साल से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए संचालित निरोगी काया अभियान में डेढ़ लाख लोगों की हुई स्क्रीनिंग

भोपाल
असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए चलाए जा रहे निरोगी काया अभियान के तहत भोपाल में अब तक एक लाख 55 हजार 373 लोगों की उच्च रक्तचाप की स्क्रीनिंग हुई है, जबकि एक लाख 45 हजार 653 लोगों की डायबिटीज की जांच की गई है। 31 मार्च तक चलने वाले इस विशेष अभियान में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की मधुमेह, उच्च रक्तचाप, नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज, ओरल, ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल स्क्रीनिंग की जा रही है। ये स्क्रीनिंग आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक, सिविल डिस्पेंसरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पतालों एवं जिला पर की जा रही है। हितग्राहियों की जांच और उपचार की रिपोर्ट एनसीडी पोर्टल में दर्ज की जा रही है।

अभियान में अब तक 12139 लोगों में उच्च रक्तचाप और 13648 में डायबिटीज पाई गई है। इन लोगों को अभियान के दौरान ही पहली बार हाइपरटेंशन और डायबिटीज का पता चला। चिह्नित रोगियों का उपचार नजदीकी स्वास्थ्य संस्थाओं से प्रारंभ किया गया है। दवाइयों के साथ-साथ जीवन शैली में परिवर्तन, खानपान एवं व्यायाम की सलाह भी दी गई है। 46226 लोगों में नॉन एल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज की स्क्रीनिंग की गई है, इनमें से 11261 लोगों में प्रारंभिक लक्षण मिले हैं। अभियान के दौरान जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं और फील्ड में पहुंचकर दी जा रही सेवाओं की जानकारी ली जा रही है। नए मरीजों की पहचान के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर सीबैक फॉर्म में जानकारी इकट्ठे की जा रही है। सीबैक फॉर्म से प्राप्त जानकारी के आधार पर असंचारी रोग स्क्रीनिंग एवं पंजीयन किया जा रहा है।

अभियान में स्क्रीनिंग के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए विभिन्न बीमारियों के लक्षण, उससे बचाव एवं उपचार के संबंध में जानकारी दी जा रही है। मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा अभियान की जानकारी देकर लोगों की जांच करवाई जा रही है। जिन लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है, उनकी रिस्क्रीनिंग करवाई जा रही है। संतुलित आहार, बेहतर खानपान, नियमित योग, प्राणायाम तथा व्यायाम करने की सलाह भी दी जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि असंचारी रोग जीवन घातक हो सकते हैं , इसलिए इनकी नियमित जांच बेहद जरूरी है। इन बीमारियों का पारिवारिक इतिहास होने पर अपनी जांच अवश्य कराई जानी चाहिए।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति