सेंचुरी मायने रखती है, लेकिन टीम के हित से ऊपर कुछ भी नहीं! यही दिखाया पंजाब किंग्स के कैप्टन श्रेयस अय्यर ने

नई दिल्ली
पर्सनल माइलस्टोन मायने रखता है। सेंचुरी मायने रखती है। लेकिन टीम के हित से ऊपर कुछ भी नहीं! यही दिखाया पंजाब किंग्स के कैप्टन श्रेयस अय्यर ने। मंगलवार को अहमदाबाद में गुजरात टाइटंस के खिलाफ अय्यर ने महज 42 गेंदों में 97 रनों की नाबाद पारी खेली। उनके पास आईपीएल में अपना पहला शतक लगाने का भरपूर मौका था। पहले बल्लेबाजी करते हुए 19वें ओवर के खात्मे पर पंजाब किंग्स का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर 220 रन था। अय्यर 97 रन बना चुके थे तो शशांक सिंह 10 गेंदों पर ताबड़तोड़ 22 रन बटोर चुके थे। सामने कोई रन का टारगेट नहीं था। चेज नहीं कर रहे थे। आखिरी ओवर में स्ट्राइक शशांक के पास थी। सिंगल से छोर बदलते ही अय्यर सेंचुरी पूरी कर सकते थे लेकिन उन्होंने आखिरी ओवर की शुरुआत से ठीक पहले शशांक से कहा- मेरी सेंचुरी की चिंता मत करो। जितना ज्यादा हो सके, रन बनाओ।

आखिरी ओवर की शुरुआत से ठीक पहले अय्यर शशांक के पास पहुंचे और उनसे कुछ बात की। आखिर उन्होंने पार्टनर से क्या कहा, इसका खुलासा खुद शशांक ने मैच के बाद किया। उन्होंने बताया कि अय्यर ने आखिरी ओवर शुरू होने से पहले उनसे कहा कि मेरी सेंचुरी की फिक्र मत करना, टीम के लिए जितना अधिक से अधिक रन बटोर सकते हो, इस पर फोकस करना। शशांक ने भी अपने कप्तान को निराश नहीं किया और उनके भरोसे पर खरे उतरे। उन्होंने पूरा ओवर खेला और गुजरात के गेंदबाज मोहम्मद सिराज की ऐसी धुलाई की कि वह याद रखेंगे।

आखिरी ओवर में शशांक का धूमधड़ाका
गुजरात की तरफ से आखिरी ओवर लेकर आए मोहम्मद सिराज। लेकिन श्रेयस अय्यर की हौसलाफजाई के बाद शशांत को जैसे अलग ही मूड में थे। एक के बाद एक उन्होंने सिराज की गेंदों को सीमारेखा से बाहर पहुंचाना शुरू कर दिया। 4,2,4,4,4,4…बीच में एक वाइड भी। इस तरह शशांक आखिरी ओवर में पंजाब किंग्स के खाते में 23 रन जोड़ दिए। उन्होंने मात्र 16 गेंदों में 6 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 44 रन की नाबाद तूफानी पारी खेली। दूसरे छोर पर श्रेयस अय्यर शतक 97 रनों पर नाबाद खड़े रहे। पंजाब की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 243 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। बाद में जब शशांक से अय्यर का शतक नहीं पूरा हो पाने को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब था, 'हां, ये अच्छा कैमियो था। लेकिन श्रेयस को देखकर मुझे और प्रेरणा मिली। ईमानदारी से कहूं तो श्रेयस ने पहले बॉल से ही मुझे कह रखा था कि मेरे शतक की परवाह मत करना। सिर्फ गेंद को देखो और उसके हिसाब से खेलो।'

उन्होंने आगे कहा, 'मैंने कोशिश की और ये सुनिश्चित किया कि मैं बाउंड्री लगा लगाऊं। जब आप उस नंबर पर बैटिंग करते हैं तो ये भी मुमकिन है कि आप हमेशा अच्छे से हिट नहीं कर पाए। मुझे पता है कि मैं कौन से शॉट खेल सकता हूं। मैंने अपनी ताकत पर फोकस किया न कि उन चीजों पर जिनको मैं नहीं कर सकता।' पंजाब ने मैच को 11 रनों से जीत लिया। 244 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात टाइटंस 20 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 232 रन ही जुटा सकी। जीटी ने जिस तरह से लक्ष्य का पीछा किया और करीब तक पहुंची, वो बताता है कि पंजाब की टीम ने अगर आखिरी ओवर में 23 रन नहीं बटोरी होती तो ये मैच उनकी हाथ से लगभग फिसल ही जाता।

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