मध्यप्रदेश में पंचायतें 1000 नए तालाबों का निर्माण करेंगी, 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे

भोपाल

 मध्यप्रदेश को 90 लघु व मध्यम सिंचाई परियोजनाएं मिलेंगी, 50 हजार खेत तालाबों का निर्माण होगा। जबकि पंचायतें 1000 नए तालाबों का निर्माण करेंगी। साथ ही एमपी में 40 हजार किलोमीतर लंबी नहरों को पक्का करने का काम भी जल्द शुरू होगा।

प्रदेश(MP News) के सभी 55 जिलों की वाटर बॉडीज का डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे इनके संरक्षण के प्रयास शुरू हो सकेंगे। इसके लिए हर गांव से दो-तीन महिला-पुरुषों का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे। प्रदेश को पानीदार बनाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, नगरीय विकास सहित 12 से अधिक विभागों ने मिलकर एक योजना बनाई है, जिसमें ये काम शामिल किए गए है। इन पर 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत काम शुरू होंगे, जो 30 जून तक जारी रहेंगे।

धरती और पानी बचाने हर हाथ बनेगा जगन्नाथ

सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि "इस अभियान में जागरुकता कार्यक्रम तो चलाए ही जाएंगे, इनके अलावा आम लोगों को जलसंक्षण के प्रति जागरुक करने नदियों और तालाब पर छोटे बांधों का निर्माण और आस पास छोटे फलदार पौधे लगाए जाएंगे. इसके अलावा प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक जन आंदोलन बनाएं."

ऐसा है अभियान

जल गंगा संवर्धन अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा। नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा। प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे। नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा। नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे। सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा। नहरों को मार्क कर विलेज-मेप पर ष्शासकीय नहरष् के रूप में अंकित किया जाएगा। बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। करीब 40 हजार किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के सफाई कार्य। फ्लशबार की मरम्मत कार्य किए जाएंगे। स्लूस-वैल की सफाई कार्य भी इसी अभियान के दौरान होंगे। सदानीरा फिल्म समारोह, जल सम्मेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आख्यान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन किये जायेंगे।

कार्ययोजना में इन कार्यों पर भी रहेगा जोर

-नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जाएगी।

-ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्रोतों का संरक्षण होगा।

-50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के काम होंगे।

-नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम के काम भी होंगे।

-नर्मदा परिक्रमा पथ का चिह्नांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की तैयारी की जाएगी।

-ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल लगेंगी, लोगों को जल संरचनाओं की जिमेदारी सौंपी जाएगी।

-सीवेज का गंदा पानी जल स्रोतों में न मिले, इसके लिए सोक पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

-नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन के काम भी होंगे।

– बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।

– सदानीरा फिल्म समारोह, जल समेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आयान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन होंगे।

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