दामाद राहुलदेव ने खुद को दतिया का 14वां राजा घोषित किया, ठाकुर समाज और राजपरिवार का विरोध, किया क्षत्रिय समाज से बाहर

दतिया

 अब देश में लोकतंत्र का राज है, फिर भी पुरानी मान्यताओं के आधार राजशाही की परंपरा दतिया में है। यहां के राजपरिवार में विवाद गहरा गया है।परिवार के दामाद राहुल देव सिंह ने रामनवमी के दिन समारोह आयोजित कर राज्याभिषेक कर खुद को 14वां राजा घोषित कर दिया था। अपना नया नामकरण दतिया रियासतकाल के आखिरी राजा गोविंद सिंह जूदेव के नाम पर गोविंद सिंह जूदेव कर लिया है, वहीं दतिया राजपरिवार और क्षत्रिय समाज ने समारोह को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए विरोध किया।

समाज ने क्यों किया राहुल देव सिंह का विरोध

    दतिया राजपरिवार के महाराजा गोविंद सिंह जूदेव दतिया के अंतिम शासक थे, जिनका निधन 1951 में हुआ। उनके दो पुत्र बलभद्र सिंह और जसवंत सिंह हुए। बलभद्र सिंह के बाद महाराजा किशन सिंह बने।

    उनके निधन के बाद महाराज की पदवी राजेंद्र सिंह को मिली। उनकी मृत्यु के बाद 30 अप्रैल 2020 को उनके ज्येष्ठ पुत्र अरुणादित्य देव को 14वां राजा घोषित किया गया था।
    ऐसे में वर्तमान राजा के होते हुए परिवार के दामाद के राज्याभिषेक को क्षत्रिय समाज ने परंपरा के विपरीत बताया है, क्योंकि वह जसवंत सिंह के परिवार के दामाद है।

राजतिलक समारोह में जुटे दो दर्जन से अधिक राजघराने

कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए देशभर के लगभग दो दर्जन राजघरानों के राजा-महाराजा, सांसद, रेसलर और कंप्यूटर बाबा समेत कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। अयोध्या और वाराणसी से आए ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार और विधिविधान से रस्में अदा कीं।

राहुल देव सिंह को पारंपरिक पोशाक पहनाकर पकड़ी पहनाई गई और उन्हें दतिया के 14वें राजा के रूप में स्वयंभू घोषित किया गया।

ठाकुर समाज और राजपरिवार ने जताया विरोध

दतिया राजघराने और ठाकुर समाज ने इस आयोजन को पूरी तरह अवैध बताते हुए राहुल देव सिंह और उनके परिवार को समाज से बेदखल कर दिया है। समाज की ओर से दतिया एसपी वीरेंद्र मिश्रा को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।

घनश्याम सिंह ने यह भी कहा कि राहुल देव सिंह का शुरुआती जीवन बहुत संघर्षपूर्ण था। वे पहले डांसर बनना चाहते थे, फिर फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत आजमाई, लेकिन जब इसमें सफलता नहीं मिली, तो वे राजनीति में आए और अपनी पत्नी को चुनाव में उतारा, जहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में धर्म की ओर रुझान हुआ और वे महामंडलेश्वर बन गए। अब उन्हें महाराजा बनने की लालसा हो गई है।

दतिया रियासत का ऐतिहासिक क्रम

महाराजा गोविंद सिंह दतिया के अंतिम शासक थे, जिनका निधन 1951 में हुआ। उनके दो पुत्र – बलभद्र सिंह और जसवंत सिंह थे।

बलभद्र सिंह के बाद महाराजा किशन सिंह, फिर महाराजा राजेंद्र सिंह और अंतत 30 अप्रैल 2020 को अरुणादित्य देव को 14वां राजा घोषित किया गया। इस लिहाज से समाज का दावा है कि राहुल देव सिंह का राजतिलक पूर्णत अवैध और परंपरा के विपरीत है।

दतिया किले में हुई समाज की बैठक

रविवार को दतिया किले में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें ठाकुर समाज और राजघराने के वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए। बैठक में राहुल देव सिंह और उनके परिवार को समाज से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।

राहुल देव सिंह ने भी रखा अपना पक्ष

विरोध को लेकर राहुल देव सिंह का कहना है कि जिसको उनका यह कदम बुरा लग रहा है, उसकी अपनी राय हो सकती है, लेकिन उन्होंने अपनी वंश परंपरा को निभाया है। कुछ लोग उनके समाज से बहिष्कृत करने की बात कह रहे हैं तो कहने दो।

वसीयत को बताया था वजह

राज्याभिषेक के आमंत्रण बांटे जाने के बाद से ही विवाद गहरा गया। इसके बाद राजपरिवार के संरक्षक पूर्व विधायक घनश्याम सिंह और वर्तमान महाराज अरुणादित्य देव ने आयोजन को गलत बताया था।

उन्होंने राहुल देव सिंह की इस बात को भी गलत बताया कि उनकी दादी सास पद्माकुमारी की वसीयत में दामाद के राज्याभिषेक की बात है, जबकि पूर्व में भी राजघराने में जमीन को लेकर विवाद के दौरान ही उनकी वसीयत सामने आ चुकी है। उसमें ऐसा कोई उल्लेख नहीं था। घनश्याम सिंह ने वसीयत के ही कूटरचित होने का दावा किया था।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति