सभी जातियों को एकजुट करने घर-घर दस्तक देंगा संघ: मोहन भागवत

कानपुर

इस साल अक्तूबर में विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। ऐसे में संघ की ओर से संकल्प लिया गया है कि तब तक पूरे देश की सभी जातियों को एकजुट करने के लिए हर हिंदू के घर-घर जाकर दस्तक दी जाएगी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत बुधवार को कारवालो नगर के संघ भवन से करीब 12 किलोमीटर दूर कोयला नगर में स्थापित शाखा में सुबह-सुबह पहुंचे। यहां उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि शहर के प्रत्येक मोहल्ले, गली, बस्ती, कस्बों और गांव-गांव में शाखाएं लगाई जाएं इसके लिए काम करना है।

उन्होंने कहा कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी का संघ से परिचय हो, यह आवश्यक है। समाज में संघ के विचार फैलें, इसके लिए भी स्वयं सेवकों को काम करना है। उन्होंने कहा कि हर बस्ती के प्रत्येक घर में एक-एक स्वयंसेवक तैयार करें जो समाज के लिए काम करे, हमें इस दिशा में काम करना है।

भागवत ने कहा कि हर समाज का विचार, संस्कृति, भावना, सोच एक जैसी हो, इस दिशा में हम सभी को सोचना है। उन्होंने कहा कि यह काम सिर्फ स्वयंसेवकों को ही नहीं समाज में रहने वाले हर व्यक्ति, जनप्रतिनिधि सभी को करना है।
 
जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव रोकने के लिए शैक्षणिक, धार्मिक संस्थाएं हों एकजुट : भागवत
जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्यावरण में हो रहे बदलाव और लोगों पर पड़ रहे उसके दुष्प्रभाव को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने चिंता जाहिर की है। बुधवार को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जुड़े संघ के कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि लगातार कम हो रहे वन, नीचे जा रहा भूजल, मिलावटी खाद्य सामग्रियां, सिकुड़ रहीं नदियों पर अंकुश नहीं लगा तो स्थिति काफी भयावह होगी। भागवत ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर छह स्तर पर काम करने की बात कही।

 उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक संस्थाओं, नारी शक्ति, स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ जनसंपर्क और जन संवाद के माध्यम से इसमें सुधार लाया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के तहत पौधे लगाओ, पानी बचाओ, पॉलिथीन हटाओ के नारे के साथ काम करने की जरूरत बताई। साैर ऊर्जा पर भी विशेष जोर दिया।
 
उन्होंने इस अभियान से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ते हुए कहा कि घर की बनावट चाहे जैसी हो लेकिन वहां की बालकनी में, छत पर पौधे जरूर लगाएं। सरसंघचालक ने कहा कि जीवन में राष्ट्रभक्ति का भाव आना चाहिए। जैसे यह बिजली और पानी हमारे देश का है। इसे बेकार नहीं करना है। जब राष्ट्र प्रथम का भाव होगा तो हम छोटी-छोटी बातों पर भी विचार करेंगे।

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