भोपाल मंडल द्वारा लोको पायलटों की कार्य स्थितियों को सुदृढ़ बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास

वातानुकूलित लोको, उन्नत प्रशिक्षण, और बेहतर कार्य वातावरण के साथ लोको पायलटों के लिए सुविधा संपन्न वातावरण का निर्माण

भोपाल

भारतीय रेलवे के समर्पित लोको पायलट भारतीय रेल परिचालन व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो देशभर में यात्री एवं मालगाड़ियों को सुरक्षित, समयबद्ध एवं कुशलता से उनके गंतव्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके कार्य वातावरण को और अधिक सहज, सुरक्षित और सुविधा युक्त बनाने के उद्देश्य से रेलवे प्रशासन द्वारा अनेक पहलें की जा रही हैं, जिसमें पश्चिम मध्य रेलवे अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

वर्ष 2024-25 के दौरान पश्चिम मध्य रेलवे ने लोको पायलटों की सुविधा के लिए 27 और लोकोमोटिव्स में वातानुकूलन सुविधा प्रदान की है। इस प्रकार, मार्च 2025 तक कुल 562 लोको को एयर कंडीशनर से सुसज्जित किया जा चुका है। यह सुविधा न केवल गर्मी में राहत देती है, बल्कि लंबे समय तक ट्रेनों का संचालन करते समय ड्राइवर की एकाग्रता और दक्षता को भी बनाए रखती है।

रेलवे द्वारा लोकोमोटिव्स की केबिनों को एर्गोनोमिक सीटों और आधुनिक तकनीकों से युक्त कर उन्हें "क्रू फ्रेंडली" बनाया जा रहा है। पश्चिम मध्य रेलवे के तहत 858 लोकोमोटिव्स को क्रू-फ्रेंडली कैबिन के रूप में विकसित करने की दिशा में सतत कार्य जारी है।

लोको पायलटों की दक्षता और प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाने के लिए सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। रनिंग स्टाफ के लिए विशेष सुरक्षा सेमिनार, परिवारों के साथ संवाद और परामर्श शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि उनके मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सतर्कता में सुधार हो सके।

भारतीय रेलवे के सभी नए लोकोमोटिव्स में शौचालय की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है और पुराने इंजनों में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से यह सुविधा जोड़ी जा रही है। डिज़ाइन में आवश्यक संशोधन कर इन्हें अधिक उपयोगी बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, भारी ट्रैफिक वाले मार्गों पर नए रनिंग रूम स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे रनिंग स्टाफ को विश्राम के लिए पर्याप्त समय मिल सके और उनकी कार्य अवधि में भी संतुलन बना रहे।

वर्तमान तकनीकी प्रगति के अनुरूप, फॉग सेफ्टी उपकरण, ड्राइवर अलर्ट सिस्टम, ‘कवच’ तकनीक और उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम जैसी सुविधाओं से लोको पायलटों को कोहरे या विषम परिस्थितियों में भी सुरक्षित संचालन में सहायता मिल रही है। इसके अलावा, ऑनबोर्ड सुविधाओं, वॉकी-टॉकी संचार व्यवस्था और स्टेशनों पर नाश्ते तथा टॉयलेट ब्रेक की सहूलियत ने लोको पायलटों की कार्य संतुष्टि में वृद्धि की है।

विभिन्न श्रेणियों की ट्रेनों — जैसे मालगाड़ी, पैसेंजर, मेल/एक्सप्रेस एवं मेट्रो/सबअर्बन सेवाओं — में कार्यरत लोको पायलटों को शेड्यूल के अनुसार विश्राम और सुविधा का ध्यान रखा जाता है। स्टेशन पर ट्रेन के ठहराव के समय वे शौचालय एवं नाश्ते की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं और इस दौरान स्टेशन स्टाफ भी पूरा सहयोग प्रदान करता है।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति