मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश में बेकाबू हालात छोड़ विदेश दौरे पर निकले, इधर हरकत में आई खालिदा की पार्टी

ढाका 
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद सत्ता की बागडोर संभालने वाले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आग तेज हो गई है। इस बीच यूनुस के इस्तीफा देने की खबरें भी सामने आई थी। अब यूनुस विरोध के इस तूफान को शांत करने के बजाय विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस बीच बुधवार को ढाका में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अंतर्गत काम करने वाली संगठनों ने बड़ी रैली का आयोजन किया है।

बता दें कि बांग्लादेश में यूनुस सरकार के खिलाफ कई वर्गों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। देश के स्कूल टीचरों के अलावा सरकारी कर्मचारी भी बड़े पैमाने पर विरोध कर रहे हैं। विवाद के केंद्र में सरकार का नया कानून है। इस कानून के तहत सरकार अनुशासनात्मक उल्लंघन के मामले में सरकारी कर्मचारियों को बिना किसी औपचारिक विभागीय जांच के सिर्फ शो कॉज नोटिस देकर बर्खास्त कर सकती है।

जापान रवाना हुए यूनुस
इस बीच यूनुस चार दिवसीय दौरे के लिए जापान रवाना हो गए हैं। यूनुस यहां 30वें निक्केई फोरम में हिस्सा लेंगे। दौरे पर वह जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से भी मुलाकात कर सकते है। । निवेश, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सात समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

BNP की बड़ी रैली
वहीं BNP ने मौका लपकते हुए देश में बड़ी रैली का आयोजन किया है। रैली के आयोजकों का कहना है कि नयापल्टन में बीएनपी की इस रैली में लाखों समर्थकों के पहुंचने होने की उम्मीद है। बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान इस रैली को वर्चुअली संबोधित करने जा रहे हैं। बता दें कि बीते कुछ दिनों से रहमान बीएनपी के प्रमुख प्रवक्ता रहे हैं और यूनुस सरकार लगातार निशाना साध रहे हैं। बीएनपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने 24 मई को यूनुस से मुलाकात कर देश में जल्द से जल्द चुनाव करने की मांग को भी दोहराया था।

चुनाव को लेकर टकराव
खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी ने कई बार यह कहा है कि यूनुस सरकार लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार नहीं है और इसीलिए अंतरिम सरकार के पास देश के बड़े फैसले लेने के अधिकार नहीं हैं। पार्टी ने सेना के साथ सुर मिलाते हुए इस साल के अंत तक चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। हालांकि यूनुस इसके लिए तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। चारों तरफ से बढ़ते दबाव के बाद भी चुनाव को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है।

 

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