LIC ने अडानी पोर्ट्स का ₹5,000 करोड़ का पूरा नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर इश्यू खरीदा

नई दिल्ली
 देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी ने अडानी ग्रुप पर बड़ा दांव खेला है। LIC ने अडानी पोर्ट्स का ₹5,000 करोड़ का पूरा नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) इश्यू खरीद लिया है। इसका मतलब है कि LIC ने अडानी पोर्ट्स को ₹5,000 करोड़ का लोन दिया है। अडानी पोर्ट्स देश का सबसे बड़ा प्राइवेट पोर्ट ऑपरेटर है। कंपनी का कहना है कि वह एलआईसी से मिले पैसे का इस्तेमाल अपने पुराने लोन चुकाने और कारोबार को बढ़ाने में करेगी। कंपनी अपने पुराने लोन को कम ब्याज दर वाले लोन से बदलना चाहती है। इससे कंपनी को फायदा होगा क्योंकि उसे कम ब्याज देना होगा।

यह 15 साल का बॉन्ड है, जिस पर 7.75% का ब्याज मिलेगा। यह अडानी ग्रुप द्वारा हाल के महीनों में जारी किए गए सबसे लंबे समय के बॉन्ड में से एक है। इसका मतलब है कि अडानी पोर्ट्स को 15 साल बाद LIC को यह पैसा वापस करना होगा और LIC को इस पर 7.75% ब्याज मिलेगा। LIC के पास अभी अडानी पोर्ट्स की 8.06% हिस्सेदारी है। गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप अपने लोन को चुकाने की अवधि को बढ़ाने और कम ब्याज दरों पर लोन लेने की कोशिश कर रहा है।

एलआईसी का निवेश

कंपनी ने बताया कि रणनीतिक तरीके से लोन लेने के कारण उनका औसत ब्याज दर FY25 में 7.92% हो गया है, जो पिछले साल 9.02% था। एक घरेलू ब्रोकरेज के फिक्स्ड इनकम के हेड ने कहा कि यह डील दिखाती है कि LIC कॉर्पोरेट बॉन्ड में बड़ा निवेश कर रही है। FY25 के अंत तक LIC ने कॉर्पोरेट बॉन्ड में ₹80,000 करोड़ का निवेश किया था। LIC और अडानी पोर्ट्स के प्रवक्ताओं ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

31 मार्च तक अडानी पोर्ट्स पर ₹36,422 करोड़ का कर्ज था, जबकि Ebitda ₹20,471 करोड़ था। नेट डेट-टू-एबिटा अनुपात 1.78 गुना था, जो FY24 में 2.3 गुना था। कंपनी की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 633 मिलियन मीट्रिक टन है और पिछले वित्तीय वर्ष में इसने 450 MMT कार्गो संभाला। अडानी पोर्ट्स के पास भारत में 15 बंदरगाह और टर्मिनल हैं। इसके अलावा, इजराइल, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका में भी इसके एसेट्स हैं।

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