पीलीभीत टाइगर रिजर्व: चार दिन और घूम लें पीटीआर, फिर पांच माह तक नहीं कर सकेंगे बाघ के दीदार

पीलीभीत 
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र 15 जून को समाप्त हो जाएगा। अगर आप जंगल की सैर और बाघ के दीदार करना चाहते हैं तो सिर्फ चार दिन तक मौका है। इसके बाद पीटीआर के द्वार बंद हो जाएंगे। जंगल की खूबसूरती और बाघों की निराली दुनिया से सुर्खियों में रहने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के पर्यटन सत्र में सैलानी चार दिन और घूम सकते हैं। 15 जून को शाम सात बजे पीटीआर के द्वार पांच माह के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके लिए मंगलवार देर रात प्रधान मुख्य वन संरक्षक की ओर से आदेश जारी किया गया है। पीटीआर में अबतक 50 हजार से अधिक सैलानी पहुंच चुके हैं।

महोफ रेंज में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थल चूका बीच देश में मिनी गोवा के रूप में प्रसिद्ध है। सात माह तक चलने वाले पीटीआर के पर्यटन सत्र के द्वार 15 नवंबर को आम सैलानियों को खोल दिए जाते हैं। इसके बाद से देश-विदेश से सैलानियों की बेहतर आमद होती है। पीटीआर के पर्यटन में चूका बीच का अद्भुत नजारे के साथ जंगल की खूबसूरती व उसमें विचरण करते बाघों का दीदार सैलानियों को रोमांचित करता है। लगभग हर सफारी में सैलानियों को प्रतिदिन बाघों के दीदार करने को मिलते हैं। 

विभागीय अफसरों का दावा है कि इस सत्र में हर रोज सैलानियों को बाघों के दीदार हुए। अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में पीटीआर इस मामले में सबसे आगे है। यही वजह है कि पीटीआर में सैलानियों की आमद पूर्व के रिकॉर्ड को तोड़ती जा रही है। इस बार अबतक करीब 50 हजार से अधिक सैलानी घूमने आ चुके हैं। इधर 15 जून को पर्यटन सत्र बंद होने का आदेश जारी हो गया है। ऐसे में चार दिन शेष होने के चलते सैलानियों की संख्या बढ़ सकती है। 

चूका बीच की हटें बुक, जंगल सफारी के लिए उमड़ रही भीड़
पर्यटन सत्र समाप्त होने का समय नजदीक आते ही पीटीआर घूमने के शौकीन सैलानियों की आमद बढ़ गई है। चूका बीच पर बनी थारू हट, ट्री हट, बंबू हट 15 जून तक के लिए बुक हो चुकी हैं। वहीं जंगल सफारी के लिए रोजाना दोनों शिफ्टों में सैलानियों की संख्या बढ़ी है। सुबह से ही मुस्तफाबाद और महोफ गेट पर सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है। पीटीआर प्रशासन की ओर से जोन 1 व जोन 2 में जंगल सफारी वाहनों को भेजा जाता है। 

चार सौ से ज्यादा विदेशी सैलानी भी कर चुके भ्रमण
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की खूबसूरती के न सिर्फ देश बल्कि विदेशी सैलानी भी कायल हैं। इस सत्र में अबतक चार सौ से अधिक सैलानी चूका बीच का भ्रमण करने आ चुके हैं। पिछले सत्र की अपेक्षा विदेशी सैलानियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसमें अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका समेत अन्य देशों के सैलानी शामिल रहे।
महोफ रेंजर सहेंद्र यादव ने बताया कि पीटीआर सत्र का अंतिम दौर चल रहा है। ऐसे में सैलानियों की भीड़ में इजाफा हुआ है। सभी हटें भी बुक हैं। जंगल सफारी के लिए सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है। सुविधा के साथ सुरक्षा बिंदुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।  

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति