अयोध्या राम मंदिर की एक साल में ही तीन अरब से ज्यादा की कमाई

अयोध्या 
अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को विभिन्न स्रोतों से 2024-25 में 316.57 करोड़ यानी तीन अरब से ज्यादा की कमाई हुई है। खास ये रहा कि इस अवधि में राम मंदिर परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य पर सर्वाधिक साढ़े चार सौ करोड़ का व्यय हुआ। ये जानकारी तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टीज की बैठक में आय-व्यय के प्रस्तुत बजट से मिली। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय के मुताबिक चालू वित्त वर्ष एक अप्रैल 2025 से लेकर 31 मार्च 2026 तक चलेगा। इसके पहले एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के सभी खाते बंद हो गये है। इनका ऑडिट कराकर सितम्बर माह में आईटीआर दाखिल किया जाएगा। इस बीच बीते वित्त वर्ष में राम मंदिर में अलग-अलग स्रोतों से हुई आय का विवरण ट्रस्ट की बैठक में सार्वजनिक किया गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार तीर्थ क्षेत्र को डोनेशन एकाउंट में समर्पित धनराशि 35.01 करोड़ थी। इसी तरह दानपात्र में समर्पित धनराशि 94.30 करोड़ रही। ऑनलाइन खातों में भेजी गई धनराशि 12.79 करोड़ थी जबकि विदेशी मुद्रा के अन्तर्गत खोले गये एफसीआरए खाते में 0.55 करोड़ की आय हुई। इस तरह कुल धनराशि 173.86 करोड़ हुई। इसके अलावा अलग-अलग बैंकों में जमा धनराशि से प्राप्त ब्याज को मिला कर कुल आय 316.57 करोड़ हुई।

राम मंदिर निर्माण पर हुआ 452.76 करोड़ का खर्च
तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टीज की बैठक में प्रस्तुत आय-व्यय के रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक खर्च मंदिर निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं पर 452.76 करोड़ की धनराशि व्यय की गई। दूसरा बड़ा व्यय लैंड परचेज पर किया गया जिसमें बाग-बिजैसी व रामकोट क्षेत्र में अलग-अलग खरीदी गई जमीनों पर 105.45 करोड़ का व्यय किया गया। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल व्यय 87.56 करोड़ व अन्य मद में व्यय 1.70 करोड़ को मिलाकी कुल 652.55 करोड़ खर्च किया गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट के तुलनात्मक अध्ययन के मुताबिक एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 के मध्य कुल आय 363 .34 करोड़ रही जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह आय 208.97 करोड़ थी। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल व्यय 922.62 रहे जबकि 2022-23 में कुल व्यय 386.91 करोड़ थे।

कारसेवक पुरम में भवन-निर्माण के लिए किया गया भूमि पूजन
राम मंदिर निर्माण के बाद देश भर संगठन के अखिल भारतीय अधिकारियों से लेकर प्रांतीय अधिकारियों का आवागमन बना हुआ है। इसके चलते कारसेवक पुरम में जी प्लस टू आवासीय परियोजना के लिए भूमि पूजन किया गया। यह भूमि पूजन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव व विहिप के केन्द्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने किया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आधारशिला रखी। बताया गया कि यहां बेसमेंट में वाहनों के लिए गैराज व भूतल एवं प्रथम तल पर आठ फ्लैट का निर्माण किया गया। इसके अलावा रिसेप्शन भी शामिल हैं। बताया गया कि यहां पहले है भूतल पर गैराज था। इस गैराज की बिल्डिंग को ध्वस्त कर नये सिरे निर्माण कराया जा रहा है।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति