राजस्थान में बीते 24 घंटों में 34 नए केस सामने आए

जयपुर

राजस्थान में एक बार फिर कोरोना वायरस ने चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को प्रदेश में कोविड-19 के 34 नए केस सामने आए हैं, वहीं उदयपुर में इलाज के दौरान एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। महिला की मौत इस साल राज्य में कोरोना से हुई दूसरी मौत है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार मृतक महिला प्रतापगढ़ की निवासी थी और सांस लेने में तकलीफ के चलते उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज से अटैच एक अस्पताल में भर्ती थीं। जांच में महिला की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। इलाज के दौरान शुक्रवार को महिला की मौत हो गई। इससे पहले राजधानी जयपुर में पिछले महीने कोरोना से एक मरीज की मौत हुई थी। इस साल में अब तक यह दूसरी मौत दर्ज की गई है। मृतक महिला के सैंपल को वायरस के वैरियंट की जांच के लिए जिनोम सिक्वेंसिंग हेतु भेजा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश में 34 नए संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है। इनमें सबसे ज्यादा केस जयपुर से सामने आए हैं। यहां 22 मरीज मिले, जिनमें एक छह महीने की बच्ची भी शामिल है, जबकि उदयपुर में 4, बीकानेर में 3, जोधपुर में 2 और अजमेर, अलवर और सीकर में एक-एक मरीज की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में फिलहाल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 180 हो गई है। वहीं कुल 193 मरीज रिकवर भी हो चुके हैं।

राज्य में इस साल कोरोना के कुल 376 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें एक केस मध्यप्रदेश से जुड़ा हुआ है। जयपुर इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां 235 केस सामने आ चुके हैं, जोधपुर में 25 और अन्य जिलों में भी छुटपुट केस रिपोर्ट हुए हैं। प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। अधिकारियों के मुताबिक वायरस का ट्रैकिंग सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है और टेस्टिंग की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई है कि हल्के लक्षण दिखने पर तुरंत कोविड टेस्ट करवाएं और सार्वजनिक स्थानों पर सतर्कता बरतें। बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और फ्लू जैसी बीमारियों के बढ़ने के साथ कोरोना वायरस दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसलिए संक्रमण की रोकथाम के लिए मास्क पहनना, हाथ धोते रहना और भीड़भाड़ से बचना अब भी जरूरी है।

राज्य में पिछले दो वर्षों की अपेक्षा इस साल केस कम हैं लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए लगातार सतर्कता और ट्रैकिंग जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग अब नए मामलों की गंभीरता, अस्पताल में भर्ती दर और रिकवरी रेट के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा। विभाग का कहना है कि हालात अभी बेकाबू नहीं हैं, लेकिन आने वाले दिनों में आंकड़े बढ़ सकते हैं। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए कोरोना की निगरानी और रोकथाम पर एक बार फिर फोकस किया जा रहा है।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति