मध्य प्रदेश :टेक होम राशन घोटाला, पूर्व CS इकबाल सिंह बैंस और बेलवाल की बढ़ीं मुश्किलें

भोपाल
 टेक होम राशन घोटाला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं. कांग्रेस के पूर्व विधायक पारस सक्लेचा की शिकायत पर लोकायुक्त ने प्राथमिकी दर्ज कर 500 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में इकबाल सिंह बैंस की भूमिका की जांच शुरू कर दी है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश में साल 2018-19 से 2021-22 के बीच 500 करोड़ का टेक होम राशन घोटाला सामने आया था. इस मामले में विधायक ने पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ शिकायत की थी.

विधायक ने यह की थी शिकायत

पूर्व विधायक पारस सकलेजा ने अपनी शिकायत सीएजी की रिपोर्ट को आधार बनाकर की थी. इस शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि "पोषण आहार मामले में सीएजी ने 8 जिलों की जांच में ही सीएजी ने 500 करोड़ से ज्यादा का घोषणा चार सालों के दौरान पाया है. यदि यह जांच प्रदेश स्तर पर कराई जाए, तो यह घोटाला कई गुना बड़ा निकलकर आएगा. यह घोटाला पूरी रणनीति के तहत किया गया.

तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस अपने करीबी अधिकारी एलएम बेलवाल को वन विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लाए और उन्हें आजीविका मिशन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बना दिया. इसके बाद पोषण आहार बनाने वाली सभी 7 फैक्ट्रियों का काम आजीविका मिशन को सौंप दिया गया. जबकि इसके पहले यह काम एग्रो इंडस्ट्रिज कारपोरेशन द्वारा किया जा रहा था.

2018 में कमलनाथ की सरकार के दौरान इस काम को फिर से आजीविका मिशन से वापस ले लिया गया था, लेकिन बीजेपी की सरकार आने के बाद मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने एक बार फिर बेलवाल को संविदा पर आजीविका मिशन में लाकर सीईओ बना दिया."

लोकायुक्त ने प्राथमिकी दर्ज की

पूर्व विधायक की शिकायत के बाद लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास विभाग, आजीविका मिशन और गड़बडी से जुड़े दूसरे विभागों से जानकारी मांगी और इसमें गंभीरता दिखाई देने पर इसकी प्राथमिकी दर्ज कर ली है. हालांकि इस मामले को लेकर सीएजी ने कड़ी आपत्ति जताई थी. सीएजी की रिपोर्ट पर राज्य शासन ने अपने जवाब में कहा था कि इस गड़बड़ी को लेकर 73 अधिकारियों के खिलाफ शो कॉज नोटिस जारी किया गया है.

36 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जा रही है, 9 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. तीन अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं, इसलिए इन पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया है.

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