ग्वालियर, रायसेन सहित 20 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट, 24 घंटे में गिर सकता है 4.5 इंच पानी,1 जुलाई को झमाझम बरसेगा पानी

भोपाल 

मध्यप्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी है। सोमवार को भी मौसम विभाग ने 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, जिन जिलों में सोमवार को भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है, उनमें ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। यहां 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत बाकी के जिलों में बारिश का यलो अलर्ट है।

अति भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 1 और 2 जुलाई को प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश की चेतावनी दी है। इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में सिस्टम का असर कम देखने को मिल सकता है लेकिन ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, नर्मदापुरम, सागर, भोपाल, रीवा और शहडोल संभाग में असर ज्यादा रहेगा। 

आज इन जिलों में भारी बारिश
मौसम विभाग ने सोमवार को ग्वालियर, रायसेन, बालाघाट, मंडला, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच और दमोह में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत बाकी के जिलों में बारिश का यलो अलर्ट है।

कल इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने 1 और 2 जुलाई मध्यप्रदेश में अति अति भारी बारिश की चेतावनी दी है। मंगलवार (1 जुलाई) को ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, कटनी, मंडला, बालाघाट, हरदा, बैतूल और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का अलर्ट है। श्योपुर, नीमच, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, खरगोन, खंडवा, सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, रायसेन, सागर, दमोह, नरसिंहपुर, जबलपुर, सतना मैहर, उमरिया, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट है।

इसलिए हो रही बारिश
मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, मध्यप्रदेश से एक टर्फ गुजर रही है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम भी एक्टिव है। इसलिए तेज बारिश हो रही है। रविवार को ग्वालियर में 9 घंटे में 3 इंच से ज्यादा बारिश हुई। नर्मदापुरम, भोपाल, रायसेन, बैतूल, इंदौर, गुना, रतलाम, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, सागर, सिवनी, बालाघाट, बड़वानी, विदिशा, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, सीहोर समेत कई जिलों में भी बारिश हुई।

जानिए एमपी में कैसे और कहां से आया मानसून
भारत में मानसून (Monsoon) की एंट्री 24 मई को हुई। मानसून ने सबसे पहले केरल में दस्तक दी। फिर कर्नाटक पहुंचा। तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, आंध्र प्रदेश होते हुए 16 जून को मानसून एमपी आया। 20 जून तक मानसून ने सभी जिलों को करव कर लिया। अब पूरे सूबे में झमाझम बारिश हो रही है।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति