यूक्रेन-जापान-ग्रीस की जनसंख्या में भारी गिरावट, एक मुल्क विलुप्ति की कगार पर

नई दिल्ली

दुनिया की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। हजारों सालों के अंतराल में धरती पर इंसानों की आबादी एक अरब तक पहुंची थी। लेकिन फिर एक अरब से 8 अरब तक पहुंचने में महज 200 साल ही लगे। यही नहीं 1960 से अब तक यानी 65 सालों में दुनिया की आबादी 3 अरब से बढ़कर आठ अरब तक पहुंची है। लेकिन इस जोरदार ग्रोथ के बाद भी कुछ देश ऐसे हैं, जहां इंसानों की संख्या में कमी आ रही है। यही नहीं एक देश तुवालु पर तो अस्तित्व का खतरा ही मंडरा रहा है। पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर के इस द्वीपीय देश की आबादी महज 10 हजार ही है और अब उसमें भी गिरावट का दौर जारी है।

वर्ष 2011 में दुनिया की आबादी 7 अरब थी और महज 14 सालों में ही आंकड़ा एक अरब और बढ़ गया। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2030 तक विश्व की आबादी 8.6 अरब हो जाएगी। फिर 2050 तक आंकड़ा 9.8 अरब होगा और 2100 में यह 11.2 अरब हो जाएगी। लेकिन यूक्रेन, जापान और ग्रीस जैसे कई देश हैं, जिनकी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। यूक्रेन में तो 2002-23 में यानी एक साल के अंदर ही आबादी में 8.10 फीसदी की गिरावट आई। इस कमी की वजह युद्ध में मौतों और बड़ी संख्या में देश से पलायन को माना जा रहा है।

इसके अलावा तुवालु की आबादी में 1.80 पर्सेंट की कमी आई है। देश की आबादी ही 10 हजार है, जो अब 9 हजार से कुछ अधिक ही रह गई है। यदि संख्या इसी तरह घटती रही तो वह लुप्त होने की कगार पर होगा। तुवालु ऑस्ट्रेलिया और हवाई के बीच का एक द्वीपीय देश है। यूरोपीय देश ग्रीस की आबादी में भी कमी हो रही है और कुल 1.60 पर्सेंट की गिरावट एक दिन के अंदर ही दर्ज की गई है। वहीं सैन मारिनो की आबादी 1.10 पर्सेंट कम हुई है। कोसोवो लैंडलॉक्ड की आबादी में भी 1 फीसदी गिरावट हुई। रूस के पड़ोसी देश बेलारूस की पॉपुलेशन में 0.60 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई। बोस्निया और अलबानिया की आबादी भी इतनी ही कम हुई है।

अब बात करते हैं, जापान की। यहां भी आबादी में आधे फीसदी की कमी दर्ज की गई है। अन्य देशों में पलायन और कम जन्मदर के चलते आबादी घट रही है, लेकिन जापान में इसका एकमात्र कारण जन्मदर में कमी है। हालात ऐसे हैं कि जापान में तमाम इंसेटिव्स के ऐलान के बाद भी लोग बच्चे नहीं पैदा करने चाहते। यूक्रेन से तो बड़ी संख्या में लोग शरण के लिए दूसरे देशों में चले गए हैं। इसके अलावा युद्ध में भी हजारों लोग अब तक मारे जा चुके हैं। इस तरह यूक्रेन दुनिया में सबसे तेजी के साथ कम होती आबादी वाला देश है।

अब यदि महाद्वीप के आधार पर बात करें तो यूरोप की आबादी तेजी से घट रही है। वह अकेला ऐसा महाद्वीप है। वहीं एशिया की आबादी में तेज इजाफा हो रहा है। चीन, भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे देश एशिया में ही हैं, जिनकी आबादी सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यूरोपीय देश ग्रीस की बात करें तो उसकी आबादी 2100 तक एक मिलियन कम होकर 9 मिलियन ही रह जाएगी, जो फिलहाल 10 मिलियन है। बता दें कि रूस, इटली और द. कोरिया जैसे देशों पर भी घटती आबादी का खतरा मंडरा रहा है।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति