‘हमें इंसाफ चाहिए’—SSC परीक्षा में धांधली के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र

नई दिल्ली

देशभर में बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षा के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध मुख्य रूप से हाल ही में हुई सिलेक्शन पोस्ट फेज-13 परीक्षा में हुई भारी अनियमितताओं के कारण हो रहा है। छात्रों का गुस्सा दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना और जयपुर तक फैल चुका है, जहाँ वे 'दिल्ली चलो' आंदोलन के तहत अपनी आवाज उठा रहे हैं।

विरोध की मुख्य वजह क्या है?
इस विरोध की मुख्य वजह परीक्षा में हुई धांधली और तकनीकी खामियां हैं। छात्रों की प्रमुख शिकायतें इस प्रकार हैं:
गलत परीक्षा केंद्र: कई छात्रों को उनके गृह नगर से 400-500 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जिससे उन्हें यात्रा और सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
नए वेंडर की विफलता: छात्रों का आरोप है कि नए वेंडर एडुक्विटी की वजह से सर्वर क्रैश, बायोमेट्रिक सत्यापन में विफलता और सिस्टम हैंग होने जैसी गंभीर तकनीकी समस्याएं आईं। आरोप है कि यह वही वेंडर है, जिसे पहले व्यापम घोटाले में अनियमितताओं के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था।
अचानक परीक्षा रद्द: कई जगहों पर बिना किसी ठोस कारण के परीक्षा अचानक रद्द कर दी गई, जिससे छात्रों का समय और पैसा बर्बाद हुआ।
खराब व्यवस्था: कई परीक्षा केंद्रों पर बिजली की कटौती, खराब बैठने की व्यवस्था और असुरक्षित परिसर जैसी बुनियादी समस्याएं भी थीं।

पुलिस कार्रवाई और छात्रों का आक्रोश
31 जुलाई 2025 को 'दिल्ली चलो' आंदोलन के तहत हजारों छात्र और प्रसिद्ध शिक्षक जैसे नीतू मैम, अभिनय शर्मा और राजट यादव दिल्ली में इकट्ठा हुए। वे शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और हिरासत में लेने जैसी कार्रवाई की। छात्रों ने इस घटना को "लोकतंत्र की हत्या" बताया।

छात्रों और शिक्षकों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी सरकार और एसएससी से निम्नलिखित मांगें कर रहे हैं:
उच्च-स्तरीय जांच: नए वेंडर एडुक्विटी की नियुक्ति की निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच की जाए।
वेंडर को हटाया जाए: एडुक्विटी का कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रद्द किया जाए और एसएससी अपनी खुद की एक मजबूत तकनीकी प्रणाली विकसित करे।
पारदर्शी केंद्र आवंटन: परीक्षा केंद्र छात्रों के गृह नगर या पास के शहरों में आवंटित किए जाएं।
तुरंत समाधान: तकनीकी खामियों और अन्य समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए।

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