नदियों की सफाई में नया तरीका, 11वीं के छात्र का पर्यावरण के लिए कमाल का आविष्कार

दक्षिणी दिल्ली
जल प्रदूषण देश की बड़ी समस्या है और सरकार भी नदियों को निर्मल बनाने के लिए तमाम योजनाएं ला रही है। इसी बीच दिल्ली के एक स्कूली छात्र ने इसका बेहतरीन समाधान खोजा है। एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, पुष्प विहार में कक्षा 11वीं के छात्र अधिराज कुमार चौहान ने नदियों और तटों पर फैले कचरे को साफ करने के लिए खास मानवरहित रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट एआई संचालित अनमैम्ड मरीन व्हीकल (यूएमवी) नदियों में जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाए बिना कचरा साफ करने में सक्षम है। साथ ही, औद्योगिक और मानव अपशिष्ट सहित कचरे का पता लगाने, एकत्रित करने, अलग करने और रिसाइकलिंग का काम भी करेगा।
 
शुरुआत छोटी उम्र से 
अधिराज ने बताया कि गंगा और यमुना नदियों की हालत देखकर दुख होता था, इसलिए कुछ करने की ठानी। स्कूल में मेंटर किरनज्योत कौर के सहयोग से प्रोजेक्ट पूरा किया है। इसके दो प्रोटोटाइप तैयार कर पेटेंट के लिए भी आवेदन कर चुके हैं। इस नवाचार के लिए भारत सरकार की ओर से स्वच्छ गंगा मिशन के तहत प्रशंसा पत्र भी मिला है। प्रिंसिपल अमीता मोहन ने कहा कि छात्रों को नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए स्कूल में हरसंभव प्रोत्साहन दिया जाता है। अटल टिंकरिंग लैब में तैयार इस प्रोजेक्ट से अधिराज ने साबित किया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत छोटी उम्र से हो सकती है।
 
इस तरह करेगा यूएमवी काम
रोबोटिक वाहन को नदी में छोड़ा जाएगा और उसमें मौजूद सेंसर या कैमरा एआइ की मदद से कचरे का पता लगाएगा। इसके बाद रोबोट अल्ट्रासोनिक सेंसर का उपयोग कर रोबोट और कचरे के बीच की दूरी को मापेगा और एक कन्वेयर बेल्ट को आगे बढ़ाएगा, जो पानी की सतह के नीचे से कचरे को उठाकर एक स्टोरेज बाक्स में ले जाएगा। ये बाॅक्स वाशिंग मशीन के ड्रायर की तरह काम करेगा और गर्मी और हवा के समान दबाव से कचरा सुखाएगा। चुंबक का उपयोग करके कचरे में से धातु और अधातु को अलग कर रिसाइकलिंग के लिए भेजा जाएगा। नदी के तटों को साफ करने के लिए भी इसे इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें रोबोट अपनी मैकेनिकल आर्म्स का उपयोग कर कूड़ा उठाएगा और वही प्रक्रिया दोहराएगा।  

आइआइटी रुड़की में भी चमकाया नाम
स्कूल की टीम ने पिछले महीने आईआईटी रुड़की में हुई 3डी डिजाइनिंग प्रतियोगिता में तीसरा स्थान पाया है। इसमें टीम को पर्यावरणीय मुद्दे पर आधारित कचरा निस्तारण के अभिनव तरीकों व सुधार पर एक समस्या विवरण दिया गया था, जिसमें एक 3डी माडल डिजाइन करना था, जो प्रदूषण निदान को व्यावहारिक समाधान सुझाए। टीम ने दो घंटे में यूएमवी पर रही आधारित नदी तटों को साफ करने के उद्देश्य से एक 3डी माडल प्रोटोटाइप का डिजाइन बनाया और प्रशंसा बटोरी। अधिराज के साथ टीम में महीर सिंह, अभिनव वर्मा और मयंक मेनन भी शामिल थे।

 

  • admin

    Related Posts

    हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

    नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

    हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति