गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया और पीडियाट्रिक डॉक्टरों की बॉन्ड से होगी भर्ती

भोपाल 

प्रदेश में ऐसी संस्थाओं में गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक और एनस्थीशिया एक्सपर्ट की बॉन्ड के जरिए नियुक्ति की जाएगी जो सरकार की फर्स्ट रेफरल यूनिट में शामिल की गई हैं। ऐसे हेल्थ सेंटर्स पर बॉन्ड के जरिए 83 पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) डॉक्टर्स की भर्ती की जाए.

इन डॉक्टर्स को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसको लेकर 24 जुलाई 2025 को फैसला किया है कि प्रदेश में फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) के सुचारू संचालन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा चिन्हित स्वास्थ्य संस्थाओं में स्त्री रोग, शिशु रोग एवं निश्चेतना के पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री व डिप्लोमा बॉन्ड अवधि में शामिल माने जाएंगे।

इसी के चलते फर्स्ट फेज में इनैक्टिव एफआरयू में खाली स्त्री रोग के 35, निश्चेतना के 23 तथा शिशु रोग के 23 पदों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से बॉन्ड भरने वाले स्नातकोत्तर चिकित्सकों (पीजी डॉक्टर्स) का चयन किया जाएगा।

बॉन्ड में एनएचएम के अंतर्गत काम करने के लिए प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। इसके मुताबिक ऐसी स्वास्थ्य संस्थाओं में बॉन्ड वाले पीजी डॉक्टर्स को एनएचएम की ऑनलाइन वैकेंसी में अलग से केवल रिक्त संस्थाओं में चॉइस फिलिंग की पात्रता होगी।

बॉन्ड वाले पीजी चिकित्सकों के लिए एनएचएम की वेबसाइट पर अलग से माड्यूल तैयार किया गया है जो 22 अगस्त 2025 से प्रदर्शित होगा। इसमें पहले आने वाले बॉन्ड धारक पीजी डॉक्टर्स को पहले प्राथमिकता दी जाएगी।

यदि एक ही समय पर एक ही संस्था के लिए एक से अधिक दावेदार आवेदन करते है तो पहले एमडी और एमएस के आधार पर और इसके बाद एमबीबीएस के मार्क्स के आधार पर चयन किया जाएगा। एनएचएम अंतर्गत ऑनलाईन आवेदन के बाद चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों के परीक्षण व सत्यापन का काम इसके लिए गठित समिति द्वारा किया जाएगा इसके बाद ही संस्था का आवंटन किया जावेगा।

बॉन्ड भरने वाले डॉक्टर्स के लिए यह शर्तें जरूरी

    जिस दिन आदेश जारी होगा, उस तारीख से 10 दिवस की अवधि में बांडधारी चिकित्सकों को अपनी उपस्थिति जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को देना अनिवार्य है।

    बांड वाले चिकित्सक द्वारा संबंधित जिला चिकित्सालय में 15 दिन का प्रशिक्षण लेने के बाद आवंटित संस्था पर उपस्थिति देना अनिवार्य है। इस समय में उपस्थित नहीं होने पर यह माना जायेगा कि बॉन्ड शर्तों का का पालन नहीं किया एवं एनएचएम इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के लिये स्वतंत्र होगा।

    पदस्थापना में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

सिर्फ एक कैजुअल लीव मिलेगी

    डिप्लोमाधारी स्नातकोत्तर चिकित्सकों को 1,10,000 रुपए प्रतिमाह तथा डिग्रीधारी को 1,25,000 रुपए प्रतिमाह दिए जाएंग।

    चिकित्सकों को एक आकस्मिक अवकाश की पात्रता हर माह होगी।

    आकस्मिक अवकाश के अलावा मातृत्व अवकाश की पात्रता होगी, किन्तु अन्य अवकाश जैसे अर्जित अवकाश, असाधारण अवकाश आदि की पात्रता नहीं होगी।

    बांड अवधि पूर्ण करने के लिए मातृत्व अवकाश अवधि की समान अवधि के लिए दोबारा काम करना होगा एवं इस अवधि में नियमानुसार पारिश्रमिक व मानदेय की पात्रता होगी।

वर्किंग रिपोर्ट के आधार पर नई नियुक्ति में मिलेगी प्राथमिकता

    चिकित्सक को दैनिक कार्य की जानकारी हर माह के अंत में संस्था प्रमुख को देना होगी तथा अनमोल एवं एफबीएनसी, एनआरसी एमआईएस में अपने कार्यों की एंट्री करना होगी जिसमें उपस्थिति के आधार पर ही मानदेय के भुगतान की कार्यवाही की जावेगी।

    यह पदस्थापना निश्चित अवधि के लिये है। इस सेवा अवधि के आधार पर चिकित्सक को नियमित नियुक्ति या वरिष्ठता, वेतन वृद्धि आदि संबंधी कोई अधिकार प्राप्त नहीं होंगे।

    बॉन्ड अवधि पूर्ण होने के बाद चिकित्सक को एनएचएम अंतर्गत नए नियुक्ति के लिए समान संस्था में कार्य करने में प्राथमिकता दी जावेगी।

आचरण को लेकर भी गाइडलाइन

ऐसे चिकित्सकों के आचरण को लेकर भी गाइडलाइन तय की गई है। इसमें कहा गया है कि चिकित्सक को जहां पदस्थापना की गई है वहां के संस्था के प्रमुख के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करना होगा।

इस दौरान निष्ठा, कर्तव्य परायणता रखने के साथ ऐसा कोई काम नहीं किया जाएगा जो उसके पद के लिए अशोभनीय है।

 

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