नई जनगणना से बदलेंगे यूपी के शहर, शहरी सीमा का विस्तार अब पक्का

लखनऊ 
उत्तर प्रदेश की शहरी सीमा अब फिलहाल नहीं बढ़ाई जाएगी। जनगणना होने के बाद ही शहरी सीमाओं का विस्तार करने और नए निकायों के बनाने पर सहमति बनी है। जनगणना कराने से पहले शहरी और ग्रामीण सीमाओं का दायरा तय किया जाता है। इसके आधार पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जनगणना कराई जाती है। जनगणना निदेशालय ने नगर विकास विभाग को पत्र भेजकर सीमाओं, वार्डों और मलिन बस्तियों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके आधार पर जनगणना का प्रारूप तय किया जाएगा।

प्रदेश में मौजूदा समय 762 नगर निकाय हैं। निकायों को ही शहरी क्षेत्र माना जाता है। इसमें मौजूदा समय 22 फीसदी आबादी रहती है। नगर विकास विभाग शहरी सीमा का विस्तार करते हुए इस आबादी को 30 से 35 फीसदी करना चाहता है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए शहरी सीमा बढ़ाने की सिफारिश की गई है। नगर विकास विभाग सीमा विस्तार करना चाहता था, लेकिन बताया जा रहा है कि जनगणना के चलते इस प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है। बताया जा रहा है कि नई जनगणना के बाद शहरी सीमा का विस्तार किया जाएगा।

जनगणना निदेशालय ने नगर विकास विभाग को पत्र भेजकर शहरी सीमा के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। नई जनगणना के लिए एक जनवरी 2010 के बाद नगर क्षेत्र की सीमा में विस्तार या किसी प्रकार का बदलाव की पूरी जानकारी मांगी गई है। इसमें निकायों में स्थित वार्डों, सीमा विस्तार व अन्य बदलावों की सूचना, वार्डों व उनमें आने वाले मुहल्लों, कालोनियों की सूची और सीमाओं को चिह्नांकन कराने, नगर समूह व वाह्य विकास की पहचान कराने के साथ ही मलिन बस्तियों की सूची मांगी गई है।

जनगणना निदेशालय के पत्र के बाद निदेशक स्थानीय निकाय अनुज कुमार झा ने इस संबंध में निकायों को पत्र भेजा है। इसमें निकायवार पूरी जानकारी विस्तृत रिपोर्ट के साथ देने को कहा गया है। इससे यह तय माना जा रहा है कि निकायों की सीमा विस्तार फिलहाल के लिए रोक दी गई है। यह माना जा रहा है कि नई जनगणना का काम पूरा होने के बाद अब विस्तार किया जाएगा।

 

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