इस्लामाबाद में बेकाबू हालात: लाठीचार्ज और फायरिंग में कई पुलिसकर्मी घायल

इस्लामाबाद 
पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के कार्यकर्ताओं के इस्लामाबाद मार्च को रोकने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और रेंजर्स के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़पें हुईं. लाहौर में हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और करीब 40 लोगों की मौत होने की खबर है. वहीं इस्लामाबाद में पाक सुरक्षा बलों ने अमेरिकी दूतावास के पास फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन की योजना बना रहे TLP नेताओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. लाठियां और गोलियां चलाईं।
अमेरिकी दूतावास के पास हजारों पुलिसकर्मी तैनात
वहीं स्थिति बिगड़ती देखकर इस्लामाबाद, लाहौल और रावलपिंडी में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गईं हैं. इस्लामाबाद रेड जोन में हजारों सुरक्षाकर्मी बैरिकेड्स लगाकर तैनात कर दिए गए हैं. अमेरिकी दूतावास के आस-पास का इलाका अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है. अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों को सतर्क रहने और प्रदर्शनकारियों से दूर रहने की चेतावनी दी है. बता दें कि पंजाब पुलिस ने बीते गुरुवार TLP प्रमुख साद हुसैन रिजवी को गिरफ्तार किया था, इसके बाद ही विरोध प्रदर्शन हिंसक होने लगे.

क्यों हो रहा है पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शन?
बता दें कि कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) गाजा में इजरायली सेना की कार्रवाई, हमले, नरसंहार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास को घेरने का ऐलान किया है, लेकिन पाक पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है. पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो रहे हैं और प्रदर्शन का विस्तार पंजाबभर में करने की धमकी दे चुके हैं. शहबाज सरकार विवाद सुलझाने के लिए बातचीत करने का ऑफर दिया है, लेकन प्रदर्शनकारी नहीं मान रहे. हिंसा, गोलीबारी और पथराव के वीडियो वायरल हो रहे हैं.
 
कैसे हुई विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की शुरुआत?
बता दें कि गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में TLP ने लब्बैक या अक्सा मिलियन मार्च बुलाया. मार्च के तहत प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को घेराव करने की योजना बनाई. विरोध प्रदर्शन 9 अक्टूबर को लाहौर से शुरू हुआ, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए TLP मुख्यालय पर रेड मारी तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया.

10 अक्टूबर के प्रदर्शनकारी लाहौर से इस्लामाबाद की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन का दमन करने के लिए सड़कों को कंटेनर बिछाकर बंद कर दिया. साथ ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद में धारा-144 लागू करके इंटरनेट बंद कर दिया. 11 और 12 अक्टूबर को लाहौर, मुरिदके और पंजाब के अन्य शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई, जिसमें करीब 10 लोग मारे गए. साद रिजवी (TLP) की हत्या होने का दावा भी किया गया है.

 

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