अभिनव बिंद्रा रचेंगे नई इतिहास—2026 विंटर ओलंपिक में उठाएंगे मशाल

नई दिल्ली
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा को अगले वर्ष होने वाले शीतकालीन ओलंपिक 2026 के लिए मशालवाहक के रूप में चुना गया है। यह खेल आयोजन 6 से 22 फरवरी, 2026 तक मिलान और कोर्टिना डी'अमपेत्जो (इटली) में आयोजित किया जाएगा। अभिनव बिंद्रा ने इस अवसर पर अपनी खुशी सोशल मीडिया पर व्यक्त करते हुए लिखा, “मिलानो कोर्टिना 2026 ओलंपिक टॉर्च रिले के लिए मशालवाहक के रूप में चुना जाना मेरे लिए वास्तव में सम्मान की बात है।

ओलंपिक मशाल हमेशा मेरे दिल के करीब रही है — यह सपनों, दृढ़ता और खेलों के जरिए विश्व एकता का प्रतीक है। इसे फिर से लेकर चलना मेरे लिए सम्मान और प्रेरणा दोनों है। इस अद्भुत सम्मान के लिए मिलानो कोर्टिना 2026 का धन्यवाद।” बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। यह चौथा अवसर होगा जब इटली शीतकालीन ओलंपिक की मेज़बानी करेगा। इस बार के संस्करण में 16 विधाओं में कुल 116 पदक स्पर्धाएं होंगी, जो बीजिंग 2022 की तुलना में 7 इवेंट और 1 नई विधा अधिक हैं।

 

admin

Related Posts

AUS vs PAK क्लैश: विश्व कप वार्म-अप में कौन दिखाएगा असली दम?

नई दिल्ली टी20 विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच 3 मैच की सीरीज गुरुवार से शुरू हो रही है। इसके जरिए पाकिस्तानी टीम को विश्व कप की…

तारीफ कम पड़ेगी — अभिषेक शर्मा ने पावर हिटिंग में क्रिस गेल को छोड़ा पीछे, कैफ का बड़ा बयान

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा है कि वह निरंतरता के साथ आक्रामक बल्लेबाजी के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति