तेंदुलकर ने गुरशरण को किया याद, हाथ में फ्रैक्चर के बावजूद मैदान में आए ताकि शतक पूरा कर सकूं

मुंबई 
सचिन तेंदुलकर ने मंगलवार को पूर्व भारतीय खिलाड़ी गुरशरण सिंह के उस जज्बे को याद किया जिसमें वह 1989-90 में दिल्ली के खिलाफ ईरानी कप मैच में शेष भारत के लिए हाथ में फ्रैक्चर के बावजूद 11वें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए ताकि मास्टर ब्लास्टर अपना शतक पूरा कर सके।  वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दिल्ली ने शेष भारत को 309 रनों से हरा दिया था। इस मैच में टीम के लिए सिर्फ तेंदुलकर ही डट कर बल्लेबाजी कर सके। उन्होंने नाबाद 103 रन की पारी खेली जबकि भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज डब्ल्यूवी रमन 41 रनों के साथ दूसरे सर्वोच्च स्कोरर थे। शेष भारत की टीम ने 554 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 209 रनों पर 9 विकेट गंवा दिए थे। 

भारत, दिल्ली और पंजाब के पूर्व खिलाड़ी गुरशरण इसके बाद हाथ में फ्रैक्चर के बावजूद 11वें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे और तेंदुलकर का साथ दिया। दोनों ने अंतिम विकेट के लिए 36 रन जोड़े। तेंदुलकर का शतक पूरा होने के बाद गुरशरण रिटायर आउट हो गए। इस तरह शेष भारत की दूसरी पारी 245 रन पर सिमटी। 

तेंदुलकर ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘जैसा कि कहा जाता है, वादे निभाने के लिए होते हैं। मुझे लगता है कि मैं एक कदम आगे जाकर कहूंगा कि वादे निभाने के लिए होते हैं, लेकिन उन्हें पूरा भी करना होता है… और यही हमारा ‘डीएनए' है। मुझे एक घटना याद है। बहुत पहले 1989 में जब मैं ईरानी ट्रॉफी खेल रहा था। यह भारत के लिए चुने जाने से पहले एक ट्रायल मैच जैसा था। मैं 90 रन के आस पास बल्लेबाजी कर रहा था, और मेरे साथी गुरशरण सिंह को चोट लग गई थी। उनके हाथ में फ्रैक्चर था और उन्हें बल्लेबाजी नहीं करनी थी।' 

तेंदुलकर ने कहा, ‘चयन समिति के अध्यक्ष राज सिंह डूंगरपुर ने हालांकि उन्हें मैदान पर जाकर बल्लेबाजी करने और अपने साथी (तेंदुलकर) का साथ देने के लिए कहा। गुरशरण आए और उन्होंने मुझे शतक तक पहुंचने में मदद की और उसके बाद मैं भारत के लिए खेलने के लिए चुन लिया गया।' उन्होंने कहा, ‘इसके बाद गुरशरण भी भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने।'

तेंदुलकर ने कहा कि भारत के लिए टेस्ट और वनडे में एक-एक मैच खेलने वाले गुरशरण का यह कदम उनके दिल को छू गया। तेंदुलकर ने कहा, ‘मैंने मैदान पर और ड्रेसिंग रूम में उनका बहुत-बहुत शुक्रिया अदा किया क्योंकि फ्रैक्चर हाथ के साथ मैदान पर उतरना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी।' 

 

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