‘जिस फॉर्मेट ने पहचान दी, उसका सम्मान करो’ — चौथे एशेज के दो दिन में खत्म होने पर ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज नाराज़

मेलबर्न 
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच चौथा एशेज टेस्ट सिर्फ दो दिन में खत्म होने के बाद ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्रेग चैपल ने कहा है कि दोनों टीमों को खेल के उस फॉर्मेट की इज्जत करनी चाहिए जिसने उन्हें पहचान दी है। गौरतलब है कि यहां मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया मुकाबला दूसरे दिन के तीसरे सत्र में खत्म हो गया। ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के सामने 178 रन का लक्ष्य रखा, जिसे बेन स्टोक्स की टीम ने छह विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। 

चैपल ने अपने एक लेख में कहा, 'इतिहास के पन्नों में दर्ज ‘मॉन्युमेंट्स मेन' वे लोग हैं जो अतुल्य खजानों की रक्षा करते हैं। ये ऐसे महिला और पुरुष कलाकारों, इतिहासकारों, शिल्पकारों और संग्रहालय निदेशकों का का समूह था जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर जंग में झोंके गए कला और शिल्प के शाहकारों की हिफाजत की।' 

उन्होंने कहा, 'हमें एशेज को भी इसी तरह देखना चाहिए। सन 1877 में शुरू हुई 148 साल पुरानी यह ‘दुश्मनी' अब अपने 150 साल पूरे करने के बहुत करीब है। ऐसे में जब बॉक्सिंग डे टेस्ट सिर्फ दो दिन में खत्म हो जाता है तो मन में इस पवित्र विरासत के लिये डर पैदा होता है।' 

चैपल ने कहा कि जो मैच टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े आयोजन के वैभव की मिसाल बन सकता था, वह एक तमाशा बनकर रह गया। इस अनंत प्रतियोगिता में बंधे हुए दो देश इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया अपने दर्शकों को सिर्फ दो दिन का मुकाबला ही परोस सके। चैपल ने मैच के जल्दी खत्म होने के लिये पिच क्यूरेटर मैट पेज को ज़म्मिेदार ठहराने के बजाय बल्लेबाज़ों की कुशलता पर सवाल उठाया। 

उन्होंने कहा, 'दोनों टीमों के बल्लेबाज ऐसे बिखर गए जैसे तेज हवा में पतझड़ के पत्ते। विकेट गुच्छों में गिरे। टीमों के स्कोर 200 भी पार न कर सके। एमसीजी में मौजूद 90,000 लोगों का मजमा उस यादगार मुकाबले से महरूम रह गया जिसका वह हकदार था।' 

उन्होंने अपने लेख के अंत में कहा, 'मैं समझता हूं कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट ने खेल को बदल दिया है और आज बाज़ार में दबाव झेलने की क्षमता से ज्यादा ताकत को अहमियत दी जाती है, लेकिन अगर आधुनिक खेल के खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट को सच में अहमियत देते हैं, जैसा कि वे कहते हैं, तो उन्हें किसी भी परिस्थिति में कम से कम 100 ओवर तक मिलकर बैटिंग करके यह दिखाना होगा। अगर वे ऐसा नहीं कर सकते, या नहीं करेंगे, तो यह फॉर्मेट खत्म हो जाएगा।' ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड अब पांचवें टेस्ट के लिये चार जनवरी से मैदान पर उतरेंगे। ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज में 3-1 की अविजित बढ़त बना चुका है। 
 

 

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