दक्षिण की रणनीति: 2026 की संभावनाएँ, केरल पर फोकस और तमिलनाडु से कनेक्ट की कवायद

नई दिल्ली
वर्तमान में देश के 21 राज्यों में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हौसले भविष्य के लिए बुलंद हैं। साल 2025 में हवा का रुख बदला तो दशकों बाद दिल्ली भाजपा की हो गई। कुछ महीनों में भाजपा ने बिहार को भी मजबूत कर लिया और फिर साल बीतते-बीतते केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम भाजपा के रंग में रंग गई। यह जीत सिर्फ एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं, बल्कि 2026 में दक्षिण भारत की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट मानी जा रही है।

पश्चिम बंगाल के अलावा दक्षिण भारत के राज्यों केरल और तमिलनाडु में साल 2026 में चुनाव हैं। उत्तर भारत में भाजपा का परचम पहले से ही लहरा रहा है, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और झारखंड को छोड़ दें तो पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब पार्टी की नजरें दक्षिण भारत पर टिकी हैं, वह क्षेत्र जहां कर्नाटक को छोड़कर अब तक सत्ता का स्वाद नहीं मिला। बिहार जीतते ही प्रधानमंत्री मोदी ऐलान कर चुके हैं कि अगला मिशन पश्चिम बंगाल है, लेकिन तमिलनाडु और खासकर केरल में भाजपा की जमीनी तैयारियां काफी कुछ बयां करती हैं। तिरुवनंतपुरम की जीत इसका ताजा उदाहरण है।

पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु तीनों विधानसभाओं का कार्यकाल मई में पूरा होगा। 7 मई वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल का आखिरी दिन होगा, जबकि तमिलनाडु विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 10 मई और केरल विधानसभा का 23 मई है। लिहाजा, इससे पहले नई विधानसभा चुनी जानी है।

चुनावों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दौरे शुरू हो चुके हैं, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया यात्रा भी शामिल है। 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने 'तमिल भाषा' का जिक्र करके तमिलनाडु को कनेक्ट किया। उन्होंने 28 दिसंबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में काशी के स्कूलों में तमिल भाषा सिखाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की बात की।
वहीं, तिरुवनंतपुरम की जीत को भाजपा की 'दक्षिणी दस्तक' के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।

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