बदरीनाथ-केदारनाथ कि तीर्थयात्रियों को सरल-सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए समिति प्रतिबद्ध

देहरादून
 चारधाम यात्रा में एक बार फिर रौनक लौटने लगी है। बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में अभी तक 20 लाख 52 हजार 897 श्रद्धालु दर्शन को पहुंच चुके हैं। आगामी दिनों में यात्रियों की संख्या में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। अभी दोनों धामों में प्रत्येक दिन पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं। यात्रियों की आशातीत वृद्धि पर बदरी—केदार मंदिर समिति उत्साहित है।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंन्द्र अजय का कहना है कि तीर्थयात्रियों को सरल-सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए समिति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मानसून अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है। बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हो रही है। हर दिन लगभग पांच हजार से अधिक श्रद्धालु दोनों धामों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग दुरस्त है। कुछ स्थानों पर बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं लेकिन सड़क मार्ग सुचारू है और यात्रा निरंतर चल रही है। आज धामों में रूक-रूक कर बारिश हो रही है लेकिन मौसम सामान्यतया यात्रा के लिए अनुकूल है।

बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंन्द्र अजय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व से चारधाम यात्रा पुनः तेजी से शुरू हो गई है। इस बार आपदा के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं केदारनाथ क्षेत्र में रहकर रेस्क्यू कार्यों के लिए दिशा-निर्देश देते रहे। फलस्वरूप पुन: तीर्थयात्री सुरक्षा की भावना और विश्वास के साथ धामों की यात्रा पर आ रहे हैं। मंदिर समिति तीर्थयात्रियों को सरल-सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है।

केदारनाथ धाम 1108471 और बदरीनाथ में 942077 भक्त पहुंचे

बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के अनुसार अभी तक साढ़े बीस लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम के दर्शन किये हैं। इस यात्रा वर्ष अभी तक 942077 से अधिक श्रद्धालु बदरीनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं। केदारनाथ धाम में 1108471 श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर चुके हैं। सहवर्ती मंदिरों, द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों को आ रहे हैं। तुंगनाथ में 94 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन को पहुंच गये हैं। अभी तक 2052897 श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ-केदारनाथ धाम के दर्शन कर लिए हैं।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि अतिवृष्टि के दौरान मंदिर समिति की ओर से भंडारे आयोजित किये, विश्राम गृहों में तीर्थयात्रियों के लिए निशुल्क आवास व्यवस्था की गयी। दोनों धामों में तीर्थयात्रियों को बारिश से बचाव के लिए दर्शन पंक्ति में रेन शेल्टर बनाये गये हैं और सर्दियों के बचाव के लिए अलाव की व्यवस्था की गयी है। मंदिर समिति की ओर से तीर्थयात्रियों की किसी भी तरह की सहायता लिए सभी संबंधित विभागों पुलिस प्रशासन और यात्रा से जुड़ी एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया गया है। आगामी श्राद्ध पक्ष और नवरात्रि के दौरान भी धामों में तीर्थयात्रियों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

 

 

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति