जगन मोहन रेड्डी परिवार ने जो पाप किया है वो अक्षम्य है ये सात पीढ़ी तक निकलता है इसकी जितनी निंदा की जाये कम है: मंत्री सारंग

भोपाल

विश्व प्रसिद्द तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलावटी, अशुद्ध लड्डू का मामला गर्माता जा रहा है, चंद्रबाबू नायडू सरकार के खुलासे के बाद आंध्रप्रदेश की पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी सरकार पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। भाजपा ने इसे लेकर बड़ा हमला किया है और इसे एक अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया है, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ये पाप है, अक्षम्य अपराध है जो सात पीढ़ी तक निकलता है।

उन्होंने कहा कि ये जो मामला सामने आया है उससे सम्पूर्ण हिन्दू समाज शर्मसार है, जगन मोहन रेड्डी की तत्कालीन सरकार ने बदतमीजी और घ्रणा की सभी सीमाएं लाँघ दी। वो तिरुपति बालाजी मंदिर जो करोड़ों हिन्दुओं के आदर और श्रद्धा का केंद्र हैं वहां के लड्डू (प्रसादम) में इस तरह की मिलावट करना, मुझे लगता है ये अंतरराष्ट्रीय साजिश है हमें ये सोचना पड़ेगा कि जगन मोहन रेड्डी ने ऐसा क्यों किया?

बड़ा सवाल कांग्रेस ऐसे कृत्यों को संरक्षण क्यों दे रही है

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि हमें देखना होगा कि कांग्रेस इस तरह के कृत्य को संरक्षण क्यों दे रही है, हिन्दू धर्म का अपमान करना, हिन्दू आस्था पर चोट करना, सनातन धर्म को अपमानित करना ये एक बड़ी साजिश है। कांग्रेस के नेता, जगन मोहन रेड्डी सहित अन्य कई नेता हिन्दू देवी देवताओं का लगातार अपमान करते आये हैं लेकिन ये तो पाप है।

रेड्डी परिवार ने जो पाप किया वो अक्षम्य है

उन्होंने कहा कि पाप करने वाले को ध्यान रखना चाहिए पाप का केवल प्रायश्चित नहीं होता ये अक्षम्य अपराध है इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जायेगा, जगन मोहन रेड्डी परिवार ने जो पाप किया है वो अक्षम्य है ये सात पीढ़ी तक निकलता है इसकी जितनी निंदा की जाये कम है।

नायडू सरकार द्वारा कराई गई जाँच में हुआ है खुलासा

आपको बता दें कि तिरुमाला स्थित भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू (प्रसादम) को बनाने वाले घी में जानवरों की चर्बी, मछली का तेल आदि की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने तिरुपति मंदिर में चढ़ने वाले लड्डू की जांच की और रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ उसके सामने आने के बाद बवाल मचा हुआ है।

मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी का बयान भी आया सामने

मुख्यमंत्री नायडू ने जगन मोहन रेड्डी सरकार पर तिरुपति के लड्डू की पवित्रता ख़राब करने के आरोप लगाये थे हालाँकि वाईएसआर कांग्रेस ने इन आरोपों कोनकार दिया है। ये मुद्दा देश में तूफान मचाये हुए है इसी बीच मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी रमण दीक्षाथलु का बयान भी सामने आया है उन्होंने कहा कि लड्डू बनाने वाले घी में मिलावट की उन्हें जानकारी थी इसकी शिकायत उन्होंने संबंधित अधिकारियों और देवस्थानम प्रमुख के सामने भी रखी थी लेकिन किसी ने इसपर ध्यान नहीं दिया।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति