मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू अपनी पत्नी के साथ ताजमहल देखने के लिए पहुंचे आगरा

आगरा

ताजमहल का दीदार करने के लिए मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू और प्रथम महिला साजिदा मोहम्मद आगरा पहुंच गईं हैं। आगरा में खेरिया एयरपोर्ट पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सीधे ताज पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। उन्होंने ताज का दीदार किया और यहां फोटोग्राफी भी कराई।

राष्ट्रपति एयरपोर्ट से सीधे शिल्पग्राम पहुंचें। वहां उन्हें प्रदेश की संस्कृति और धरोहर से अवगत कराने के लिए मयूर नृत्य और रास प्रदर्शित किया गया। ताजमहल भ्रमण के बाद एयरफोर्स स्टेशन के खेरिया टेक्निकल एयरपोर्ट से मालदीव के लिए रवाना होंगे। कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यह भारत और मालदीव के मैत्रीपूर्ण संबंधों को और सुदृढ़ करने का एक ऐतिहासिक पल होगा।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति