वनरक्षक भर्ती परीक्षा में किया था फर्जीवाड़ा, व्यापम मामले में 4 आरोपियों को सजा, 7-7 साल की जेल और जुर्माना

भोपाल
मध्य प्रदेश के व्यापम मामले में चार आरोपियों को सजा सुनाई गई है। भोपाल की विशेष न्यायालय ने चार आरोपियों को सात-सात साल की सजा और 10-10 हजार का जुर्माना लगाया है। आरोपियों ने अपने स्थान पर दूसरे छात्रों को बिठाकर परीक्षा पास की थी।

सीबीआई व्यापम प्रकरण के विशेष न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसोदिया ने एसटीएफ भोपाल के अपराध क्रमांक 12/2015 जो कि 15.04.2014 एसटीएफ भोपाल द्वारा कायम किया गया था। जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार सीबीआई ने अग्रिम विवेचना कर पूरक अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था। इस पूरे मामले में कुल 4 आरोपीयों को प्रत्येक को सात-सात साल के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये के अर्थ दंड से भी दंडित किया है।

सी.बी.आई. के लोक अभियोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि व्यापम ने वर्ष 2012 में मध्य प्रदेश वन रक्षक भर्ती परीक्षा-2012 आयोजित की थी। जिसमें 4 अभ्यथियों रामचित्र कौशल, भूप सिंह, शेर सिंह जाटव और राजेश सोलंकी ने अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति (प्रतिरूपक) को लिखित परीक्षा में बैठाकर पास करने के लिए दलालों के व मध्यस्तों से मिलीभगत कर परीक्षा पास की थी। इन चारों आभ्यर्थी के स्थान पर अज्ञात प्रतिरूपको ने परीक्षा दी थी। परिणाम स्वरूप ये चारों अभ्यार्थी मध्य प्रदेश वन रक्षक भर्ती परीक्षा-2012 में पास हो गए थे।

आज मंगलवार को न्यायालय ने कई गवाहों, दस्तावेजों और आर्टिकल्स आधार पर चारों अभ्यथियों रामचित्र कौशल, भूप सिंह, शेर सिंह जाटव और राजेश सोलंकी को सजा सुनाई है। सभी को न्यायालय ने सात-सात वर्ष कठोर कारावास के साथ ही दस-दस हजार रुपए अर्ध दण्ड से भी दण्डित किया है।

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