शीतकालीन सत्र के दौरान बीजेपी सांसद ने प्रियंका गांधी को थमा दिया सिख विरोधी दंगों वाला बैग, ‘खून’ से रंगा 1984

नई दिल्ली
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस बार 'बैग पॉलिटिक्स' की भी जमकर चर्चा हुई। एक तरफ सत्तापक्ष संविधान और इमर्जेंसी पर चर्चा करने में मशगूल रहा तो दूसरी तरफ पहली बार लोकसभा पहुंचीं प्रियंका गांधी अपने अलग अंदाज से हैरान कर रही थीं। एक दिन वह फिलिस्तीन लिखा बैग लेकर संसद पहुंचीं तो अगले दिन बांग्लादेश लिखा हुआ बैग लेकर पहुंच गईं। जानकारों ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम दोनों को साधने के लिए प्रियंका गांधी ने अपने बैग से ही बड़ा संदेश दे दिया। वहीं इस सिलसिले में बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने 1984 लिखा हुआ बैग प्रियंका गांधी को दे दिया। इस बैग में 1984 को खून से रंगा गया दिखाया गया है। बीजेपी सांसद ने बैग देकर सिख विरोधी दंगों की याद दिलाने की कोशिश की है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रियंका गांधी ने यह बैग ले भी लिया।

अपराजिता सारंगी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, कांग्रेस की सार्थकता का सवाल है। कांग्रेस को बार-बार देश की जनता नकारा है। उन्होंने कहा कि अमित शाह के भाषण को तोड़ मरोड़कर जनता को दिग्भ्रमित करने के अलावा कांग्रेस के पास कोई बात नहीं बची है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की करतूतों की याद दिलाने के लिए यह बैग दिया गया है। इसमें खून की छीटें भी हैं।

बता दें कि 10 दिसंबर को भी प्रियंका गांधी एक बैग लेकर पहुंची थीं जिसपर मोदी-अडानी भाई-भाई लिखा हुआ था। इसपर एक तरफ पीएण मोदी तो दूसरी तरफ गौतम अडानी की तस्वीर छपी हुई थी। वहीं जयंत चौधरी ने चुटकी लते हुए प्रियंका गांधी के बैग पर कविता भी सुना दी थी। बता दें कि आज ही संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन था। राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित की जा चुकी है। वहीं लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।

आज सुबह से ही संसद भवन परिसर में हलचल तेज थी। संसद भवन के मकर द्वार पर सांसदों को जमावड़ा था। इसके बाद विपक्षी सांसद विजय चौक की तरफ बढ़ गए। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और पीएम मोदी और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि अमित शाह ने सदन में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर का अपमान किया है। इसी को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान गुरुवार को संसद के गेट पर धक्का-मुक्की हो गई थी जिसमें दो बीजेपी सांसद घायल हो गए थे।

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