उच्च शिक्षा मंत्री का कान पकड़कर उठक बैठक लगाने वाला वीडियो वायरल, अपने स्कूल के स्थापना दिवस में पहुंचे थे मंत्री

शाजापुर
 मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने शुजालपुर स्थित सीएम राइज स्कूल के पूर्व छात्र सम्मेलन में स्कूल के दिनों को याद करते हुए कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई। यह अनोखा वाकया देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। मंत्री के साथ अन्य पूर्व छात्रों, प्रोफेसरों और अधिकारियों ने भी उठक-बैठक लगाई और पुराने गाने गाए। यह सम्मेलन स्कूल के पुराने दिनों को याद करने और पूर्व छात्रों के मिलन का एक मंच बना। मंत्री परमार ने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए भारत को विश्व गुरु बताया।

उच्च शिक्षा मंत्री ने लगाई उठक-बैठक

शाजापुर जिले के शुजालपुर में स्थित सीएम राइज स्कूल में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार अपने दौरे के दौरान स्कूल पहुंचे और वहां पूर्व छात्र सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान मंत्री परमार ने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई। मंत्री जी का यह अंदाज़ देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। मंत्री के साथ-साथ कई अन्य पूर्व छात्र, प्रोफेसर, अधिकारी और शिक्षक भी कान पकड़कर उठक-बैठक लगाते नज़र आए। इसके अलावा, लोगों ने क्लास रूम में टेबल बजाकर पुराने गाने भी गाए।

स्कूल के स्थापना दिवस पर लगाई उठक-बैठक

शुजालपुर के इस स्कूल की स्थापना 1931 में श्री राम मंदिर के पीछे हुई थी। इसे 'लाल स्कूल' के नाम से जाना जाता था। 1957 में हाईस्कूल की कक्षाएं वर्तमान सीएम राइज स्कूल भवन में शुरू हुईं। मंगलवार को आयोजित इस पूर्व छात्र सम्मेलन में कई पूर्व छात्र दशकों बाद अपने स्कूल लौटे। कुछ लोग 67 साल बाद, तो कुछ 85 साल की उम्र में लकड़ी के सहारे इस यादगार आयोजन में शामिल होने पहुंचे।

वहीं, क्लास रूम में शिक्षकों द्वारा दी जाने वाली सजा 'कान पकड़कर उठक-बैठक' को याद करते हुए पूर्व छात्रों ने अपने शिक्षकों के नाम लेकर 'अमर रहे' के नारे लगाए। इसके साथ ही, उन्होंने पुराने गाने गुनगुनाए, सेल्फी लीं और ग्रुप फोटो खिंचवाकर इस पल को यादगार बनाया।

प्रोफेसर एमआर नालमें ने बताया कि साल 1951 में मेरी हाईस्कूल क्लास में 19 लड़के थे। तब सेकंड डिविजन पास होना भी बहुत बड़ी बात होती थी।" उन्होंने यह भी बताया कि साल 1957 में स्कूल इसी भवन में लगने लगा था। 1 जनवरी 1957 को इस स्कूल में दाखिला लेने वाले राम शर्मा ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इसी स्कूल से पढ़ी हैं। वे इस स्कूल के छात्र और शिक्षक दोनों रहे हैं।

नई शिक्षा नीति से आएगा बड़ा परिवर्तन

मंत्री परमार ने इस मौके पर नई शिक्षा नीति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से बड़ा परिवर्तन आने वाला है। अब भारत में शिक्षक 'बाय चांस' नहीं, बल्कि 'बाय चॉइस' बनेंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने आयुर्वेद, इंजीनियरिंग, शल्य चिकित्सा, गणित, संस्कृति, संस्कार, हर क्षेत्र में विश्व को मार्गदर्शित किया है, इसलिए भारत को विश्व गुरु कहा जाता है। इस सम्मेलन ने पूर्व छात्रों को अपने स्कूल के दिनों की यादें ताजा करने और एक-दूसरे से मिलने का एक अच्छा अवसर प्रदान किया।

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