सिंगापुर चैंपियनशिप में पलक ने जीते पांच पदक, 3 स्वर्ण, 1 रजत और एक कांस्य

इंदौर

इंदौर की अंतर्राष्ट्रीय गोताखोर पलक ने एक बार फिर अपनी जीत से इतिहास रच दिया है। सिंगापुर में 30 अगस्त से एक सितंबर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सिंगापुर नेशनल एक्वेटिक चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पलक ने छह इवेंट खेल में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक, एक रजत पदक और एक कांस्य पदक हासिल किया है।

छह अलग-अलग इवेंट में मेडल
यह पहला मौका है जब एक ही चैंपियनशिप में छह अलग-अलग इवेंट के पांच इवेंट में मेडल जीते हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि सिंगापुर नेशनल चैंपियनशिप में किसी भारतीय लड़की ने पांच पदक एक साथ जीते हैं। पलक वर्तमान में इंदौर के सरकारी स्विमिंग पूल नेहरू पार्क तरण ताल में गुरु द्रोणाचार्य अवार्ड कोच रमेश व्यास से प्रतिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

पलक का सपना है कि वह भारत के लिए बड़े खेलों में प्रतिनिधित्व करें, इससे पूर्व में वर्ल्ड एक्वेटिक चैंपियनशिप के लिए भी चुनी गई थी और वह भारत की पहली महिला गोताखोर बनी थीं। वहीं एशियाई खेल ओलंपिक सहित अन्य स्पर्धाओं में भी वह भारत का प्रतिनिधित्व कर देश को स्वर्ण पदक दिलवा चुकी हैं।

हर खिलाड़ी का सपना होता है देश के लिए खेलना
पलक ने बताया कि, "देश का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। मैंने इस स्पर्धा के लिए कड़ी तैयारी की थी। कोच के मार्गदर्शन में लगातार अपनी तकनीक सुधारने पर मेहनत कर रही हूं। इसके साथ ही फिटनेस को लेकर भी सुबह व्यायाम करती हूं।" छोटी उम्र में बच्चों को खाने-पीने का बहुत शौक होता है, लेकिन पलक अपने इस शौक पर भी नियंत्रण रखना सीख गई हैं।

पहले भी जीत चुकी हैं कई अंतरराष्ट्रीय पदक
पलक जूनियर के साथ ही पिछले कुछ वर्षों से सीनियर वर्ग में भी चुनौती पेश करते हुए पदकीय सफलताएं हासिल कर चुकी हैं। वर्ष 2019 में पलक ने 10वीं एशियन एज ग्रुप गोताखोरी चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर अपना नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाया था।

इससे पहले इस अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में देश की कोई भी महिला खिलाड़ी पदक नहीं जीत सकी थी। यह उपलब्धि हासिल करने वाली पलक देश की पहली खिलाड़ी बनी थीं। पलक को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एकलव्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

राष्ट्रीय स्तर पर बेटी ने रोशन किया नाम
पलक राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर वर्ग में लगातार पदक जीतती आ रही हैं। बेंगलुरु में 2021 में सीनियर राष्ट्रीय स्पर्धा में पलक ने एक स्वर्ण, एक रजत, एक कांस्य पदक जीता था। यहां भी उनके सामने स्वयं से उम्र में दोगुनी बड़ी खिलाड़ियों की चुनौती थी। राजकोट में सीनियर राष्ट्रीय तैराकी स्पर्धा में भी तीन वर्गों में भाग लेते हुए तीनों में स्वर्ण पदक जीते थे। यहां पलक स्पर्धा की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुनी गई थीं। गोवा में आयोजित नेशनल गेम्स में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता था।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति