खीलखेत में दुर्गा मंदिर को ढहाने के सरकार के फैसले के विरोध में मानव श्रृंखला बनाई, भड़का हिंदू समुदाय

ढाका 
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के शाहबाग में शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। उन्होंने खीलखेत में दुर्गा मंदिर को ढहाने के सरकार के फैसले के विरोध में मानव श्रृंखला बनाई। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के कार्यवाहक महासचिव मणिंद्र कुमार नाथ ने इस बारे में अधिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सनातनी समूह के लोग मंदिर के ध्वंस के खिलाफ विरोध जताने के लिए यहां एकत्रित हुए। शनिवार को ढाका प्रेस क्लब के सामने विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।' उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर ऐसे निंदनीय कृत्यों को अंजाम देने का आरोप लगाया।

मणिंद्र नाथ ने कहा, 'पिछले दिन ढाका के रेलवे लाइन के पास सरकारी बुलडोजर का उपयोग करके एक मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। हमें ऐसी क्रूर घटना का गवाह बनना पड़ा। इससे हमारी भावनाएं आहत हुई हैं। हम इस तरह के विनाशकारी और हिंसक धार्मिक उन्माद की कड़ी निंदा करते हैं। इसके विरोध में सनातनी समाज आज जागृत हुआ है।' उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य के खिलाफ हम एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। कल सुबह ढाका प्रेस क्लब के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे। हम इस कृत्य की कड़ी आलोचना करते हैं। दुर्भाग्यवश, यह सरकार ऐसे निंदनीय कृत्यों को अंजाम दे रही है और हमें सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दिख रही। वे इन घटनाओं को अफवाह बताकर लंबे समय से अनदेखा कर रहे हैं।

रेलवे अधिकारियों का क्या है तर्क
बांग्लादेश रेलवे अधिकारियों ने गुरुवार को ढाका के खीलखेत में रेलवे की जमीन पर बने दुर्गा मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह मंदिर भीड़ की ओर से इसके हटाने की मांग के तीन दिन बाद तोड़ा गया। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि मंदिर को अवैध रूप से रेलवे की जमीन पर बनाया गया था, इसलिए इसे ध्वस्त किया गया। कई अल्पसंख्यक संगठनों ने इस फैसले की निंदा की है। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने समुदाय के लोगों को पहले से कोई सूचना दिए बिना मंदिर को ध्वस्त कर दिया। मंदिर समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सोमवार रात करीब 9 बजे 500 से अधिक लोगों की भीड़ लाठियों के साथ मंदिर में उस समय पहुंची, जब वहां भक्त पूजा कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि रेलवे अधिकारियों ने केवल मंदिर को ध्वस्त किया, जबकि दूसरी अवैध इमारतों को छोड़ दिया गया।

 

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